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प्रदेश में 67 खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान

हिमाचल में मंडरा रहा बिना बारिश तबाही का खतरा! 67 ग्लेशियर झीलों को लेकर हाई अलर्ट

हिमाचल में 67 ग्लेशियर झीलों से बिना बारिश अचानक बाढ़ (GLOF) का खतरा! बचाव के लिए सरकार किन्नौर-लाहौल स्पीति में 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' लगा रही है। पढ़ें खबर।

हिमाचल में मंडरा रहा बिना बारिश तबाही का खतरा 67 ग्लेशियर झीलों को लेकर हाई अलर्ट

Himachal Pradesh Disaster Management Special Secretary Pushpinder Rana |

शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों में 67 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) की पहचान की है, जिनसे भविष्य में अचानक बाढ़ (GLOF) का बड़ा खतरा हो सकता है। सरकार ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति की चार सबसे खतरनाक झीलों पर 'प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली' (Early Warning System) स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

बारिश के बिना भी तबाही का अलर्ट

आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने शनिवार को शिमला में न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की हालिया आपदाओं ने साबित किया है कि भारी बारिश जैसे पारंपरिक चेतावनी संकेतों के बिना भी बड़ी घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "नंबर बड़ा है, चिंता का विषय तो है ही। हमने 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 67 झीलों की पहचान की है। हम सैटेलाइट डेटा के जरिए विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या वहां कोई खतरनाक स्थिति पनप रही है।"

दुर्गम इलाकों में तकनीक की चुनौती

राष्ट्रीय भूस्खलन शमन कार्यक्रम के तहत किन्नौर और लाहौल-स्पीति (पारचू झील सहित) की चार झीलों पर काम शुरू किया गया है। राणा ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क न होना बड़ी चुनौती है। सेंसर लगाने और डेटा ट्रांसफर जैसी तकनीकी चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) के साथ मिलकर काम कर रही है।

दीपांग घाट पर लगेगा सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत

NDMA से मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार दीपांग घाट पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का काम शुरू कर देगी। इसके समानांतर संभावित बाढ़ से प्रभावित होने वाले निचले इलाकों में 'हाई फ्लड लेवल' (HFL) मार्किंग का काम भी जारी है। राणा ने कहा, "भारतीय सीमा के भीतर लगभग 1,000 ऐसी झीलें हैं। इसे समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय ज्ञान और सहयोग आवश्यक है।" इसके अलावा, सरकार ने अपना आपदा प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत किया है। किसी भी आपदा की सूचना के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1077 जारी किया गया है और जिला व राज्य स्तर पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर 24 घंटे काम कर रहे हैं।

प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis & Smart FAQs)

सवाल: ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) क्या है और इससे आम जनता को क्या खतरा है?
जवाब: पहाड़ों के ऊपर बर्फ पिघलने से बनी झीलों के तटबंध जब दबाव या हिमस्खलन के कारण टूट जाते हैं, तो करोड़ों लीटर पानी अचानक नीचे घाटियों की ओर बहने लगता है। इससे फ्लैश फ्लड आती है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की जान-माल और सड़कों/पुलों को तत्काल और भारी नुकसान पहुंच सकता है।

सवाल: अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) लगने से क्या लाभ होगा?
जवाब: यह सिस्टम झील के जल स्तर और दबाव में होने वाले खतरनाक बदलावों को रीयल-टाइम में डिटेक्ट करेगा। इससे प्रशासन को पानी नीचे पहुंचने से पहले कुछ घंटों का समय मिल जाएगा, जिससे संवेदनशील इलाकों को समय रहते खाली कराया जा सकेगा।

सवाल: आपात स्थिति में मदद के लिए नागरिक कहां संपर्क कर सकते हैं?
जवाब: हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसी भी संभावित खतरे या आपदा की सूचना देने के लिए आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन 1077 जारी की है। जिला और राज्य स्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र 24 घंटे काम कर रहे हैं।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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