भोपाल। मप्र के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर...
भोपाल। मप्र के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर पहली बार विधानसभा में अपना पक्ष रखा। उन्होंने क्षेत्र की तुलना मुंबई के धारावी से करते हुए कहा कि भागीरथपुरा 80-90 साल पुरानी बस्ती है और इसकी परिस्थितियां 'मिनी धारावी' जैसी हैं। वहां कुछ अशिक्षित लोग रहते हैं, जिसकी वजह से नगर निगम के लिए व्यवस्थित काम करना कठिन हो जाता है। इन हालातों के कारण कर्मचारी भी वहां सही ढंग से काम नहीं कर पाते।
इंदौर के लिए कलंक बताया
मंत्री ने इस घटना को इंदौर के लिए एक 'कलंक' और व्यक्तिगत तौर पर 'आत्मग्लानि' का विषय बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय पार्षदों और लोगों ने दूषित पानी की शिकायत की थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हुई। उन्होंने कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन को "अशोभनीय" बताते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले में राजनीति कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष बोले - इंदौर में घोटाले की भरमार
कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंत्री के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, इंदौर में घोटालों की भरमार है, जहां रातों-रात 5 करोड़ की सीवर लाइन डाल दी जाती है। सिंघार ने दावा किया कि मौतों का आंकड़ा 35 से ज्यादा है, जबकि सरकार केवल 22 पर अटकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "मंत्री जी, आप लाशों की गिनती मत करिए, लेकिन कम से कम गिल्टी (दोष) तो फील करिए।"
जाति देखकर कार्रवाई
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कार्रवाई जाति देखकर की गई—दलित और आदिवासी अधिकारियों को हटाया गया, जबकि अन्य का सिर्फ तबादला किया गया। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने जबलपुर और जयवर्धन सिंह ने अन्य क्षेत्रों के गंदे पानी के सैंपल सदन में दिखाए।
स्थगन प्रस्ताव नामंजूर
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कांग्रेस विधायकों द्वारा दिए गए 10 स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा तो कराई, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया। अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय पर पहले भी चर्चा हो चुकी है।
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