अमरावती (आंध्र प्रदेश) [भारत]: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को एलुरु जिले में भारत के पहले गैर-जीएमओ उच्च-विस्तार वाले पॉपकॉर्न मक्का संकर बीज के अनावरण का स्वागत किया और इसे गर्व का विषय तथा घरेलू पॉपकॉर्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
स्वदेशी बीज के विकास पर नायडू ने जताई खुशी
नायडू ने कहा कि एलुरु जिले के मुसुनुरु में स्वदेशी संकर बीज के विमोचन और किसानों के अभिनंदन को देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि यह बीज नुजविद क्षेत्र में भारतीय मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्वदेशी बीज के विकास और अनावरण के लिए गौर्मेट पॉपकॉर्निका को बधाई दी और कहा कि इस पहल से घरेलू पॉपकॉर्न उत्पादन को मजबूती मिलेगी तथा आयातित किस्मों पर निर्भरता कम होगी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया बीज का अनावरण
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सोमवार को मुसुनुरु में गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज लॉन्च करने और किसानों तथा कृषि हितधारकों से बातचीत करने के लिए पहुंचे थे। अपने दौरे के दौरान, राधाकृष्णन ने मुसुनुरु स्थित गौर्मेट पॉपकॉर्निका फैक्ट्री में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने किसानों को सम्मानित किया और कृषि हितधारकों तथा अन्य प्रतिभागियों को संबोधित किया।
'मल्हार 2026' में भी शामिल हुए थे उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति का यह दौरा 21 अगस्त को नई दिल्ली में अंतर हृदय कनेक्ट द्वारा आयोजित भारतीय शास्त्रीय संगीत के युवा-केंद्रित, मानसून-थीम वाले उत्सव 'मल्हार 2026' के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद हुआ है। संगीत कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, राधाकृष्णन ने युवाओं को भारत की शास्त्रीय संगीत विरासत का अनुभव कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संगीत को भारत के सबसे मजबूत सांस्कृतिक संबंधों में से एक बताया और भारत की सॉफ्ट पावर के रूप में इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला।
युवाओं से सांस्कृतिक विरासत आगे बढ़ाने की अपील
उन्होंने युवाओं से भारत की सभ्यतागत विरासत के संरक्षक और राजदूत बनने तथा देश के शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को विश्वभर के समुदायों तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने संगीत को भारत की सॉफ्ट पावर के सबसे बड़े रूपों में से एक बताया, जो भाषा और सीमाओं को पार करने और मित्रता, समझ और सद्भावना को बढ़ावा देने में सक्षम है।
(एएनआई)
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