योगी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' स्थापित करने की नीति जारी की है।
लखनऊ: योगी सरकार प्रदेश के अंदर भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा के मुख्य प्रवाह में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के अनुरूप राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों और राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में "भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ" की स्थापना के लिए विस्तृत नीति और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस योजना का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दर्शन, विज्ञान, संस्कृति और बौद्धिक विरासत को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
सरकार चाहती है कि नई पीढ़ी केवल आधुनिक शिक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों को भी समझे और उन पर शोध कर विश्व स्तर पर नई पहचान स्थापित करे। शोधपीठों के माध्यम से भारत के महान ऋषियों, मनीषियों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों एवं समाज सुधारकों के विचारों का अध्ययन, अनुसंधान और व्यापक प्रसार किया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार का अग्रणी केंद्र बन सकेगा।
संस्थान में वर्तमान छात्र संख्या 5,000 से अधिक होना आवश्यक
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शोधपीठों की स्थापना के लिए स्पष्ट पात्रता मानक निर्धारित किए गए हैं। केवल वे विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय आवेदन कर सकेंगे, जिनकी स्थापना को कम से कम 50 वर्ष पूरे हो चुके हों। इसके साथ ही संस्थान में वर्तमान छात्र संख्या 5,000 से अधिक होना आवश्यक होगा और यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 2(f) एवं 12(B) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य होगा। योगी सरकार प्रत्येक चयनित शोधपीठ को पांच वर्षों के लिए 2 करोड़ रुपए का एकमुश्त अनुदान उपलब्ध कराएगी।
एफडी के ब्याज से होगा शोधपीठों का संचालन
यह धनराशि सावधि जमा (एफडी) के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी और उससे प्राप्त ब्याज का उपयोग शोधपीठ के नियमित संचालन, शोध गतिविधियों और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में किया जाएगा। शोधपीठों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर), दान एवं अन्य वैधानिक स्रोतों से भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे। पांच वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर शोधपीठों के कार्यों की समीक्षा कर आगे विस्तार का निर्णय लिया जाएगा।
भारतीय ज्ञान परंपराओं पर होगा उच्च स्तरीय शोध
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शोधपीठों में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, जैन एवं बौद्ध दर्शन, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, स्थापत्य कला, कृषि विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और अन्य भारतीय ज्ञान परंपराओं पर गंभीर एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन शोधपीठों के माध्यम से पीएचडी, पोस्ट-डॉक्टरेट और स्नातक एवं परास्नातक स्तर के शोधार्थियों को शोध अनुदान एवं शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के अंतर्गत शोध पुस्तकों, अनुवादों और समीक्षात्मक संस्करणों का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आईएसबीएन एवं डीओआई के साथ कराया जाएगा।
प्राचीन ज्ञान का होगा डिजिटल संरक्षण और वैश्विक प्रसार
इसके साथ ही दुर्लभ पांडुलिपियों, प्राचीन ग्रंथों एवं शोध सामग्री का डिजिटलीकरण कर उनका स्थायी संरक्षण किया जाएगा। शोध निष्कर्षों को ओपन-एक्सेस डिजिटल लाइब्रेरी और एमओओसीज प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। शोधपीठों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानमालाओं और अकादमिक सम्मेलनों का नियमित आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को विषय की गहन जानकारी प्राप्त हो सके।
संचालन समिति की जाएगी गठित
योजना के सफल संचालन के लिए प्रत्येक संस्थान में कुलपति और प्राचार्य की अध्यक्षता में संचालन समिति गठित की जाएगी। समिति में विषय विशेषज्ञ, वित्त अधिकारी एवं बाह्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। शोधपीठ के संचालन के लिए निदेशक/चेयर प्रोफेसर, शोध सहायक, शोध फेलो और डिजिटल एवं आईटी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। शोधपीठों के चयन के लिए निदेशक, उच्च शिक्षा, प्रयागराज की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति सभी प्रस्तावों का परीक्षण कर शासन को संस्तुति भेजेगी।
स्वीकृति के बाद ही बजट किया जाएगा आवंटित
स्वीकृति के बाद ही बजट आवंटित किया जाएगा। अगर किसी संस्थान द्वारा धनराशि का दुरुपयोग किया जाता है और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो शासन पूरी अनुदान राशि वापस लेने का अधिकार रखेगा। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार की यह महत्वाकांक्षी पहल उत्तर प्रदेश को भारतीय ज्ञान-विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं में अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव, आत्मविश्वास और शोध की नई चेतना विकसित होगी। साथ ही भारतीय चिंतन और ज्ञान-विज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
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