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मस्जिद ध्वस्तीकरण पर भड़कीं इकरा हसन

इकरा हसन ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर जताई कड़ी नाराजगी, कहा- लोकतंत्र को किया जा रहा कमजोर

सहारनपुर में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर की मस्जिद गिराए जाने पर सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार को घेरा। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और लोकतंत्र की हत्या बताया है।

इकरा हसन ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर जताई कड़ी नाराजगी कहा- लोकतंत्र को किया जा रहा कमजोर

Samajwadi Party Lok Sabha MP Iqra Hasan |

शामली (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी की लोकसभा सांसद इकरा हसन ने शनिवार को सहारनपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर में बनी मस्जिद को गिराए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा, "अगर सारे फैसले केवल सरकार की मनमर्जी से ही लिए जाने हैं, तो फिर कानून-व्यवस्था या न्याय व्यवस्था की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी।"

प्रशासन पर गंभीर आरोप

प्रशासन के आदेश को कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद मस्जिद गिराए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने इस कार्रवाई का विरोध करने वालों को हाई कोर्ट जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया और कई प्रमुख लोगों को नजरबंद कर दिया गया। हसन ने ANI को बताया, "सिविल कोर्ट से आदेश आने के बाद पूरी मस्जिद को सील कर दिया गया। चारों ओर बैरिकेड लगा दिए गए। और जब सभी चाहते थे कि हम अधिकारियों से बात करें ताकि कुछ समय दिया जा सके - लोग हाई कोर्ट जाना चाहते थे लेकिन वह समय नहीं दिया गया और हमें यहां नजरबंद कर दिया गया।"

नजरबंद किए जाने का दावा

उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह तड़के मस्जिद गिराए जाने से पहले सहारनपुर जिले के प्रमुख और जिम्मेदार लोगों को भी नजरबंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा, "यह बेहद शर्मनाक घटना है। यह इतना बड़ा गुनाह है कि उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी। उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। हम इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगे - यह हमारा अधिकार है।"

लोकतंत्र पर खड़े किए सवाल

मस्जिद गिराने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कैराना की सांसद ने कहा कि इससे लोकतंत्र, संवैधानिक सुरक्षा और कानून के शासन पर चिंताएं पैदा होती हैं। हसन ने कहा, "लेकिन जिस तरह से उन्होंने यह कार्रवाई की, उससे साफ पता चलता है कि लोकतंत्र की हत्या कैसे की गई है। इस देश और राज्य में हमारे संविधान और कानून के शासन को कैसे पूरी तरह से कमजोर किया जा रहा है।"

'त्वरित न्याय' की आलोचना

उन्होंने "त्वरित न्याय" शब्द के इस्तेमाल की आलोचना की और सवाल उठाया कि अगर पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया की अनुमति दिए बिना सरकारी फैसले लागू किए जाने हैं तो अदालतों की क्या आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हर जगह 'त्वरित न्याय' अपनाया जा रहा है। अगर इसी तरह से काम करना है, तो अदालतों को बंद कर देना ही बेहतर होगा। अगर सभी फैसले केवल सरकार की मनमर्जी से लिए जाने हैं, तो कानून व्यवस्था या न्यायिक प्रणाली की कोई आवश्यकता ही नहीं है।"

राजनीतिक हित साधने का आरोप

हसन ने आगे आरोप लगाया कि मस्जिद गिराने की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इसका उद्देश्य एक विशेष समुदाय को ठेस पहुंचाना था। उन्होंने कहा, "जो हुआ है वह अत्यंत निंदनीय है। लेकिन चूंकि यह एक विशिष्ट समुदाय से जुड़ा है और उन्हें ठेस पहुंचाने के मकसद से किया गया है, इसलिए यह सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए इतनी नीचे गिर गई है।"

1947 से पहले का निर्माण

उन्होंने दावा किया कि मस्जिद 1947 से पहले बनी थी और तर्क दिया कि इस पर 'पूजा स्थल अधिनियम' (Places of Worship Act) और 'वक्फ बाय यूजर' (Waqf by User) से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं। हसन ने आरोप लगाया, "फिर भी, इस मस्जिद को केवल हिंदू-मुस्लिम संघर्ष भड़काने, एक विशेष समुदाय को ठेस पहुंचाने और इससे राजनीतिक फायदा उठाने के लिए गिराया गया।"

अदालत का फैसला और कार्रवाई

यह तोड़-फोड़ तब हुई जब 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के पहले के आदेश को बरकरार रखा। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और गलत इस्तेमाल के मामले में इस ढांचे को गिराने और लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

प्रशासन और पुलिस का पक्ष

सहारनपुर के DIG अभिषेक सिंह ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पाया था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी और बाद में इस आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अहम जगहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त PAC और RAF जवानों को तैनात किया गया है, जबकि अधिकारी अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रख रहे हैं।

सरकार को कड़ी चेतावनी

हसन ने सरकार को धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तौर पर करने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "मैं इस सरकार को चेतावनी देना चाहती हूं: आप इस तरह से नहीं जीत पाएंगे।" कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी तोड़-फोड़ की आलोचना की और दावा किया कि मस्जिद 1911 से पहले से मौजूद थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड को इस कार्यवाही में पक्ष नहीं बनाया गया था और कहा कि इस मामले को कानूनी रास्ते से चुनौती दी जाएगी।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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