कोरबा में राखड़ बांध से प्रभावित ग्रामीणों ने नियमित नौकरी की मांग को लेकर काम बंद करा दिया और प्रशासन से अपने अधिकारों को पूरा करने की मांग की।
Korba Villagers Shut Down Ash Dam Work, Protest Over Pending Regular Jobs for 15 Years |
कोरबा (छत्तीसगढ़)। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह (कोरबा पूर्व) के राखड़ बांध से प्रभावित गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पड़रीपानी गांव के ग्रामीणों ने प्रबंधन की वादाखिलाफी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 15 साल से नियमित नौकरी की आस लगाए बैठे आक्रोशित ग्रामीणों ने गोढ़ी स्थित सीएसईबी राखड़ डैम का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद करा दिया है और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन पर बैठ गए हैं।
2010 की मुख्यमंत्री की घोषणा भी अधूरी
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2007 में राखड़ बांध निर्माण के लिए उनकी उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बाद 29 नवंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि अधिग्रहित भूमि के एवज में सभी 308 प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को अर्हता के अनुसार CSPGCL में नियमित सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस फैसले को कंपनी के संचालक मंडल (Board of Directors) से भी मंजूरी मिल चुकी थी।
308 में से आधे से अधिक परिवार अब भी वंचित
आंदोलनकारियों ने बताया कि घोषणा के सालों बीत जाने के बाद भी 308 में से आधे से अधिक प्रभावित परिवारों को अब तक नियमित नियुक्ति नहीं मिल पाई है। वर्तमान में लगभग 46 प्रभावित परिवार ऐसे हैं, जिन्हें प्रबंधन द्वारा स्थायी नौकरी देने के बजाय महज 3 साल के संविदा (Contract) पर रखा जा रहा है।
प्रबंधन की मनमानी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
प्रबंधन की इस मनमानी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। संविदा प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए कई ग्रामीणों ने काम करने से साफ इंकार कर दिया है और अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें वादे के मुताबिक नियमित नौकरी नहीं दी जाती, तब तक राखड़ डैम का काम पूरी तरह बंद रहेगा।
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