राजगढ़। जिले में मानवता और कानून को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। भोजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव...
राजगढ़। जिले में मानवता और कानून को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। भोजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में ग्रामीणों ने मिलकर एक 8 साल की बच्ची और 10 साल के बालक का विवाह संपन्न करा दिया, जब 'महिला एवं बाल विकास विभाग' की टीम को इसकी सूचना मिली और वे इसे रोकने पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है।
बाल विकास विभाग की टीम को धोखा देने का प्रयास
टीम को गुमराह करने के लिए ग्रामीणों ने उनके सामने एक बालिग युवक को पेश कर दिया और टीम को वहां से चले जाने की धमकी दी। टीम के वापस लौटते ही ग्रामीणों ने दबाव बनाकर और टीम को डरा-धमकाकर बच्चों के फेरे करवा दिए।
धमकी व उग्र व्यहार के आगे प्रशासन बेबस
सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी ताकि इस अपराध को रोका जा सके। हालांकि, गांव वालों ने एकजुट होकर टीम का विरोध किया। ग्रामीणों के उग्र व्यवहार और धमकियों के आगे प्रशासन बेबस नजर आया।
प्रशासन को दिया चकमा
प्रशासन को चकमा देने के लिए पहले तो एक बालिग लड़के को दूल्हा बताकर पेश किया गया, लेकिन बाद में अंधेरे और ग्रामीणों के डर का फायदा उठाकर आधी रात को मासूमों की शादी की रस्मों को अंजाम दे दिया गया।
क्या कहता है कानूनी?
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत यह एक गंभीर अपराध है। लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होना बाल विवाह की श्रेणी में आता है। इस मामले में शामिल माता-पिता, पंडित और शादी कराने वाले अन्य लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। यह घटना समाज में फैली जागरूकता की कमी और प्रशासनिक विफलता का एक बड़ा उदाहरण है।
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