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MP में 12 फसलों को GI टैग, रिकॉर्ड

मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड: एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला GI टैग, बैतूल का गाजरिया आम बना नई पहचान

मध्यप्रदेश ने इतिहास रचते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जीआई (Geographical Indication) टैग हासिल किया है।

मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को मिला gi टैग बैतूल का गाजरिया आम बना नई पहचान

Madhya Pradesh Sets Record |

बैतूल: मध्यप्रदेश ने इतिहास रचते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जीआई (Geographical Indication) टैग हासिल किया है। देश में पहली बार किसी राज्य को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिले हैं। इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश की कई पारंपरिक और विशिष्ट कृषि उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

इन फसलों को मिला GI टैग

जीआई टैग पाने वाली फसलों में बैतूल का गाजरिया आम, गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, अलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं।

कृषक कल्याण वर्ष की बड़ी उपलब्धि

राज्य सरकार ने इसे कृषक कल्याण वर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आह्वान किया है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की है।

बैतूल के गाजरिया आम को मिली नई पहचान

बैतूल जिले के खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ जैसे 500 वर्ष से अधिक पुराने किलों का इतिहास इस क्षेत्र को गोंड राजाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में दर्शाता है। इसी क्षेत्र की प्रसिद्ध गाजरिया आम की किस्म अपनी अनोखी पहचान रखती है।

अनानास जैसी खुशबू, गाजर जैसा गूदा

गाजरिया आम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनानास जैसी सुगंध और गाजर के समान रंग वाला गूदा है, जिसके कारण इसे गाजरिया आम कहा जाता है। जीआई टैग मिलने से इस आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।

इन क्षेत्रों में होता है अधिक उत्पादन

गाजरिया आम का उत्पादन मुख्य रूप से बैतूल, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली विकासखंडों में होता है। अब इन क्षेत्रों में क्लस्टर विकसित कर इसके उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की योजना बनाई गई है।

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