महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों से पहले सीट-शेयरिंग के बावजूद पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी और शिवसेना के आमने-सामने आने से महायुति गठबंधन के लिए आंतरिक चुनौती बढ़ गई है।
पुणे (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनावों से पहले सत्ताधारी महायुति गठबंधन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच सीधा मुकाबला होने वाला है।
पुणे ग्रेजुएट्स, नागपुर ग्रेजुएट्स और पुणे टीचर्स के लिए उम्मीदवारों की घोषणा
बीजेपी ने तीन निर्वाचन क्षेत्रों - पुणे ग्रेजुएट्स, नागपुर ग्रेजुएट्स और पुणे टीचर्स - के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। जहां बीजेपी ने पुणे ग्रेजुएट्स सीट से डॉ. स्मिता जाधव और पुणे टीचर्स सीट से कौस्तुभ गावड़े को मैदान में उतारा है, वहीं शिंदे की शिवसेना ने भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी मंगेश चिवटे के साथ पुणे टीचर्स सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम से महायुति गठबंधन के दो सहयोगियों के बीच चुनावी मुकाबले की संभावना बढ़ गई है।
पुणे ग्रेजुएट्स और पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नामांकन दाखिल
पुणे ग्रेजुएट्स और पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों के लिए BJP उम्मीदवारों, डॉ. स्मिता जाधव और कौस्तुभ गावड़े ने सोमवार को पुणे में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल और वरिष्ठ BJP नेता व महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल भी मौजूद थे। पुणे ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाई गईं स्मिता जाधव, DY पाटिल एजुकेशनल ग्रुप से जुड़े PD पाटिल की बेटी और 'पुढारी' ग्रुप के प्रमुख प्रताप सिंह जाधव की बहू हैं। उनकी उम्मीदवारी को पुणे और कोल्हापुर क्षेत्र में वोटरों के समीकरणों के नज़रिए से देखा जा रहा है।
शिक्षक समुदाय के बीच समर्थन मजबूत करने की रणनीतिक चाल
इस निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों से जुड़े बड़ी संख्या में वोटर अहम माने जाते हैं। उनकी उम्मीदवारी को DY पाटिल शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जाधव की उम्मीदवारी का ऐलान BJP में उनके औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले ही कर दिया गया था, जिसके बाद वह पार्टी में शामिल हो गईं। पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र के लिए BJP ने कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार बनाया है, जो कोल्हापुर में 'श्री स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्था' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। कोल्हापुर क्षेत्र के शिक्षकों के बीच इस संस्था की पहुंच को देखते हुए, BJP के इस फैसले को शिक्षक समुदाय के बीच समर्थन मजबूत करने की एक रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है।
शिवसेना के शिंदे गुट की भी इस मुकाबले में उतरने की तैयारी
हालांकि, बीजेपी के उम्मीदवार उतारने के बावजूद शिवसेना के शिंदे गुट ने भी इस मुकाबले में उतरने की तैयारी जारी रखी है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाने वाले मंगेश चिवाटे के मंगलवार को पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल करने की उम्मीद है। शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने भी साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी पुणे टीचर्स सीट पर चुनाव लड़ेगी। सामंत ने कहा, "बीजेपी ने किसे उम्मीदवार बनाया है, यह बीजेपी का अंदरूनी मामला है।" इससे संकेत मिलता है कि शिवसेना अपनी उम्मीदवारी के साथ आगे बढ़ने का इरादा रखती है। सीट-शेयरिंग समझौते के तहत, बीजेपी को पुणे ग्रेजुएट्स, नागपुर ग्रेजुएट्स और पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र मिले हैं।
विधान परिषद चुनावों ने महायुति के सामने दोहरी चुनौती पेश की
अमरावती टीचर्स सीट शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को मिली है, जबकि औरंगाबाद ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को मिला है। शिवसेना के भी पुणे टीचर्स सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी के साथ, अब सबकी नज़रें नामांकन वापस लेने की समय-सीमा से पहले 'महायुति' के भीतर होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। अगर बीजेपी और शिवसेना किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाते हैं, तो गठबंधन के इन दोनों सहयोगियों के उम्मीदवार पुणे टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं। इस तरह, विधान परिषद चुनावों ने महायुति के सामने दोहरी चुनौती पेश की है: जहाँ नागपुर में BJP को अपने ही पूर्व विधायक से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन को संभावित आंतरिक मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।
(इनपुटः ANI)
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