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मलेशिया से 3 गैंगस्टर भारत डिपोर्ट

मलेशिया से बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर लाए गए भारत, अमित शाह बोले- 2026 में 51 कुख्यात अपराधियों का प्रत्यर्पण

मलेशिया से बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर भारत लाए गए। अमित शाह ने बताया कि 2026 में अब तक 51 कुख्यात अपराधियों का प्रत्यर्पण कराया गया। विदेशी गैंगस्टरों पर शिकंजा जारी। पढ़ें पूरी खबर।

मलेशिया से बंबीहा गैंग के 3 गैंगस्टर लाए गए भारत अमित शाह बोले- 2026 में 51 कुख्यात अपराधियों का प्रत्यर्पण

Union Home Minister Amit Shah |

नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने मलेशिया में पकड़े गए बंबीहा गैंग से जुड़े तीन फरार गैंगस्टरों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवंदीप सिंह पर जबरन वसूली, सीमा पार हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी समेत पंजाब के लुधियाना में नाकाम किए गए ग्रेनेड हमले से जुड़े होने के आरोप हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित भारत के विजन के तहत भारतीय एजेंसियों ने अकेले 2026 में अब तक 51 कुख्यात अपराधियों का प्रत्यर्पण कराया है।

मलेशिया से भारत लाए गए तीनों आरोपी

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि भारतीय एजेंसियों ने मलेशिया में फरार भारतीय गैंगस्टरों को पकड़े जाने के बाद उन्हें भारत डिपोर्ट कराया और पुलिस हिरासत में भेजा। शाह के मुताबिक, इन तीनों फरार आरोपियों की पहचान जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवंदीप सिंह के रूप में हुई है। तीनों का संबंध बंबीहा गैंग से बताया गया है। इन आरोपियों पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल होने का आरोप है। इनमें जबरन वसूली, सीमा पार हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी तथा पंजाब के लुधियाना में हुए एक नाकाम ग्रेनेड हमले की साजिश से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।

भारतीय और मलेशियाई एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय

तीनों गैंगस्टरों को भारत वापस लाने की कार्रवाई भारतीय एजेंसियों और मलेशियाई अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय के जरिए संभव हुई। इस कार्रवाई को विदेश में छिपकर आपराधिक नेटवर्क संचालित करने वाले आरोपियों के खिलाफ भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय एजेंसी-समन्वय रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। 

अमित शाह ने अपने पोस्ट में कहा, "मोदी जी के सुरक्षित और संरक्षित भारत के विजन के तहत, अकेले 2026 में हमारी एजेंसियों ने 51 कुख्यात अपराधियों के प्रत्यर्पण को सुगम बनाया है।" इस बयान के साथ गृह मंत्रालय की उस नीति का भी संकेत मिलता है, जिसके तहत विदेशों में मौजूद ऐसे फरार अपराधियों और ड्रग तस्करों को तलाशकर भारत लाने पर जोर दिया जा रहा है, जिनके खिलाफ देश में गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।

UAE से लौटते ही पकड़ा गया था विरेंदर सिंह बसोया

मलेशिया से तीन गैंगस्टरों की वापसी की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही भारत के वांछित फरार आरोपी विरेंदर सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लौटने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। बसोया 14 अगस्त की सुबह IGI एयरपोर्ट पहुंचा था। उसे सिंडिकेट का विदेश में सक्रिय मुख्य संचालक और कथित साजिशकर्ता माना जाता है। आरोप है कि वह विदेश से सिंडिकेट की गतिविधियों का समन्वय करता था और भारत से दूसरे देशों में मेफेड्रोन की खेप भेजने में मदद करता था।

इंटरपोल रेड नोटिस के बाद भारत वापसी

बसोया उर्फ विरू की भारत वापसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के प्रयासों का नतीजा थी। NCB भारत की प्रमुख केंद्रीय कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों में से एक है, जो NDPS Act, 1985 के तहत नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने वाली शीर्ष संघीय एजेंसी है। एजेंसी ने बसोया को जून 2026 में UAE में गिरफ्तार किए जाने के करीब दो महीने बाद भारत वापस लाने में सफलता हासिल की। उसकी गिरफ्तारी एजेंसी के अनुरोध पर प्रकाशित INTERPOL रेड नोटिस के आधार पर हुई थी।

भारत के लिए ऐसे मामलों में आरोपी की विदेश में गिरफ्तारी के बाद उसे देश में वापस लाना इसलिए अहम है, क्योंकि इससे जांच एजेंसियों को आरोपी के खिलाफ लंबित मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई करने और उसे भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करने का रास्ता मिलता है।

ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट से जुड़ा बड़ा अभियान

गृह मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में मौजूद फरार आरोपियों को भारत लाकर उनके अपराधों के लिए कानूनी परिणामों का सामना कराना Vision Document on Drug Control (2026-2029) की दिशा में चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। यह विजन डॉक्यूमेंट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ड्रग कंट्रोल के रोडमैप के तौर पर पेश किया था। इसके तहत विदेशों से संचालित होने वाले महत्वपूर्ण नारकोटिक्स फरार आरोपियों की पहचान, उनका पता लगाने और उन्हें भारत वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अभियान में भारत की एजेंसियां अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर कार्रवाई कर रही हैं। इसका उद्देश्य केवल देश में मौजूद ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि विदेशों से संचालित होने वाले पूरे आपराधिक और नारकोटिक्स सिंडिकेट तक पहुंचना भी है।

तुर्किये और मलेशिया से पहले भी हुईं बड़ी कार्रवाइयां

इस पहल के तहत पहले भी कई वांछित ड्रग तस्करों को विदेश से भारत वापस लाया जा चुका है। इनमें मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से और नवीन चिचकर को मलेशिया से भारत लाना महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा है। खास तौर पर 59 वर्षीय कुख्यात अंतरराष्ट्रीय ड्रग सरगना मोहम्मद सलीम डोला की तुर्किये से वापसी को सीमा पार सक्रिय नारकोटिक्स सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी सफलता माना गया।

दाऊद इब्राहिम सिंडिकेट से भी जुड़ाव का आरोप

डोला को अप्रैल 2026 में 'Operation Global-Hunt' के तहत तुर्किये से डिपोर्ट किया गया था। उसकी वापसी को फरार सिंडिकेट से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में अहम सफलता के तौर पर पेश किया गया। डोला के संबंध दाऊद इब्राहिम सिंडिकेट से बताए गए हैं। तुर्किये की एजेंसियों ने उसे बेयलिकडुज़ु (Beylikduzu) में हिरासत में लिया था, जिसके बाद 28 अप्रैल 2026 को उसे भारत डिपोर्ट किया गया।

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था डोला

मलेशिया से जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवंदीप सिंह की वापसी तथा UAE से विरेंदर सिंह बसोया और तुर्किये से मोहम्मद सलीम डोला जैसे आरोपियों को भारत लाने की कार्रवाइयां एक व्यापक रणनीति की ओर इशारा करती हैं। इसका केंद्र विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों और ड्रग नेटवर्क से जुड़े आरोपियों की पहचान कर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए उन्हें भारतीय कानून के दायरे में वापस लाना है।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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