जिले के अम्बलाई गांव में NH-39 पर बने एक विशाल सिंकहोल के कारण दो दिनों में 3 दुर्घटनाएँ हुईं और 5 लोग घायल हो गए।
सीधी। जिले के अम्बलाई गांव में NH-39 पर बने एक विशाल सिंकहोल के कारण दो दिनों में 3 दुर्घटनाएँ हुईं और 5 लोग घायल हो गए। PWD ने जिम्मेदारी से इनकार कर दिया, जबकि ग्रामीणों ने खुद चेतावनी के झंडे लगाए हैं। व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक जमीन धंस गई। सीधी जिले के अम्बलाई गांव से गुजरने वाले NH-39 के बीचों-बीच एक विशाल सिंकहोल बन गया। इतना गहरा कि वह सुरंग जैसा दिखाई देता है और इतना चौड़ा कि वाहन भी उसमें समा सकते हैं।
50 से अधिक पत्थर डाले, पर पाताल का पता नहीं
घबराए हुए ग्रामीणों ने इसकी गहराई जानने के लिए इसमें 50 से अधिक बड़े पत्थर डाले, लेकिन कोई भी पत्थर उस गड्ढे को भर नहीं पाया। स्थानीय लोग इसे “पाताल का दरवाजा” कह रहे हैं, जबकि इसे ठीक करने के जिम्मेदार अधिकारी इसे किसी और विभाग की समस्या बता रहे हैं। NH-39 का यह सड़क धंसना केवल स्थानीय बुनियादी ढांचे की विफलता नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति को भी उजागर करता है। रात में बिना किसी चेतावनी के लोग मोटरसाइकिल सहित इस गड्ढे में गिर रहे हैं।
48 घंटे में तीन दुर्घटनाएँ
ग्रामीणों ने शनिवार सुबह लगभग 11 बजे सड़क को धंसते हुए पहली बार देखा। उसी रात अंधेरे में दो मोटरसाइकिल सवार इस गड्ढे में गिर गए, जिन्हें इलाज के लिए शहडोल जिले के देवलंद अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद सोमवार सुबह 9 बजे एक और दुर्घटना हुई। कुल मिलाकर दो दिनों में तीन हादसों में पांच लोग घायल हो चुके हैं। स्थानीय निवासी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने गड्ढे की गहराई जांचने के लिए 50 से ज्यादा बड़े पत्थर उसमें डाले, लेकिन कोई भी पत्थर उसे भर नहीं पाया। उनके अनुसार सड़क के नीचे का खाली हिस्सा बहुत गहरा है और उसका तल दिखाई नहीं देता। यह सिर्फ एक गड्ढा नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे संरचनात्मक धंसाव है।
ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
जब कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची, तो मंगलवार को अम्बलाई गांव के लोगों ने खुद ही व्यवस्था की। उन्होंने गड्ढे को कपड़े से ढका, पास में लकड़ी का डंडा गाड़कर उस पर चेतावनी का झंडा लगा दिया ताकि वाहन चालक सावधान हो सकें। 2026 में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा की पूरी व्यवस्था फिलहाल सिर्फ लकड़ी के डंडे पर बंधे एक झंडे तक सीमित है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को खतरे की सूचना दी, लेकिन NH-39 के अधिकारी जिले में शायद ही कभी मौजूद रहते हैं, जिससे शिकायत सही जगह तक नहीं पहुंच पाती। मंगलवार तक भी वहां न तो बैरिकेड लगाए गए थे, न चेतावनी लाइटें और न ही मरम्मत दल पहुंचा था।
PWD ने पल्ला झाड़ा, कहा- "हमने सड़क नहीं बनाई"
जब PWD अधिकारी कौशल पारते से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह सड़क PWD द्वारा निर्मित नहीं है, इसलिए उनका विभाग इसकी मरम्मत नहीं कर सकता। यह बयान भारत में सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है। एक राष्ट्रीय राजमार्ग गांव से गुजरता है, सड़क धंस जाती है, लोग घायल हो जाते हैं और राज्य का लोक निर्माण विभाग कहता है कि यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है। जबकि विभागों के बीच अधिकार क्षेत्र का विवाद जारी है और सड़क का गड्ढा और गहरा होता जा रहा है।
अतिरिक्त कलेक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया
सीधी के अतिरिक्त कलेक्टर बीपी पांडेय ने मामले को स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों को जल्द ही इस खतरनाक गड्ढे को भरने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि "जल्द" शब्द यहां बहुत मायने रखता है, क्योंकि गड्ढा तीन दिनों से खुला है, तीन दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, पांच लोग घायल हो चुके हैं और इसमें 50 पत्थर भी समा चुके हैं। दुर्घटनाओं के बाद दिए गए आश्वासन जवाबदेही नहीं होते, बल्कि यह दर्शाते हैं कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
राष्ट्रीय राजमार्ग ‘नो मैन्स लैंड’ नहीं बन सकते
भारत राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार पर लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। नए एक्सप्रेसवे और तेज सड़क निर्माण की उपलब्धियों की चर्चा होती है। लेकिन सीधी, मध्य प्रदेश में NH-39 पर बना एक सिंकहोल तीन दिनों तक खुला पड़ा रहा, क्योंकि दो विभाग यह तय नहीं कर पाए कि इसे ठीक कौन करेगा। यह बुनियादी ढांचे के निर्माण और उसके रखरखाव के बीच की खाई को दिखाता है। नई सड़कें बनाना सुर्खियां बनाता है, लेकिन मौजूदा सड़कों का रखरखाव जैसे, समय पर निरीक्षण, धंसाव के संकेतों की पहचान, तुरंत बैरिकेड लगाना, दुर्घटना से पहले मरम्मत, यही असल में लोगों की जान बचाता है।
भारत के हर राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए एक स्पष्ट आपातकालीन जिम्मेदार प्राधिकरण होना चाहिए, जो 24 घंटे उपलब्ध रहे और तय समय में कार्रवाई करे। अम्बलाई गांव के लोगों को 2026 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपने हाथों से चेतावनी झंडे लगाने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।
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