बसपा प्रमुख मायावती ने EVM पर सवाल उठाते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे की बात कही है। साथ ही चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन और राजनीतिक बयानों पर भी गरमाई सियासत।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वोटरों के मन में यह शक नहीं होना चाहिए कि उनके वोट किसी दूसरे उम्मीदवार को जा सकते हैं या उनकी गिनती किसी और के लिए हो सकती है, क्योंकि ऐसी घटना से लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा कम होगा।
वोट की गिनती को लेकर शक दूर करना जरूरी
मायावती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वोटरों का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे। उन्होंने कहा, "यह बहुत ज़रूरी है कि वोटर के मन में कोई शक न हो कि उसका वोट किसी दूसरे उम्मीदवार को चला गया या किसी और के लिए गिना गया; ऐसी घटना असल में लोकतंत्र की हत्या के बराबर होगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा खत्म कर देगी।" उन्होंने कहा कि देश के पहले चुनाव के बाद लगभग पांच दशकों तक वोटिंग के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता रहा, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनकी जगह EVM का इस्तेमाल शुरू किया।
BJP के पुराने EVM विरोध की दिलाई याद
मायावती ने याद दिलाया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब BJP ने EVM का विरोध किया था और आरोप लगाया था कि कांग्रेस इन मशीनों का गलत इस्तेमाल करके चुनाव जीतती है। उन्होंने कहा, "हालांकि, हैरानी की बात है कि चुनाव जीतने और केंद्र में सरकार बनाने के बाद भी BJP ने EVM को खत्म नहीं किया; बल्कि, इन्हीं मशीनों से वोटिंग और गिनती का तरीका जारी रखा।"
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर बढ़ी राजनीतिक बहस
मायावती का यह बयान भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद यह नया राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। इन आपत्तियों में फॉर्म 6, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
ECI ने आपत्तियों को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया कि इन आपत्तियों का मतलब अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति था। चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी सामान्य प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। इससे पहले रविवार को, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि यह संस्था भारत के नागरिकों के बजाय केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही है।
रोहित पवार ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए पवार ने कहा कि पहले के चुनाव आयुक्तों ने हमेशा संविधान का मान रखा, लेकिन मौजूदा आयुक्त ने उस निष्पक्षता से समझौता किया है। पवार ने कहा, "चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। इसके प्रमुख सरकार के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि वे भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। पहले के चुनाव आयुक्तों ने सचमुच जनता और भारत के संविधान का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन मौजूदा हालात में, ज्ञानेश कुमार जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते; अगर वे किसी का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो वह भारत सरकार है।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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