भोपाल। मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देश पर पूरे प्रदेश में 1 अप्रैल, 2026 से ड्रग्स और अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है।
नेटवर्क व ड्रग माफिया पर कड़ी कार्रवाई
डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केवल नशा करने वालों पर ही नहीं, बल्कि ड्रग्स की सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क और माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
जीरो टॉलरेंस की नीति में कुर्की जैसी कार्रवाई भी
NDPS एक्ट के तहत अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। साथ ही, तस्करी में संलिप्त लोगों की संपत्तियों की जांच और कुर्की जैसी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
युवाओं को जागरूक करना है मकसद
इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा युवाओं और छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। इसके लिए स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस विभाग 'NCORD' और अन्य पोर्टल के माध्यम से डेटा विश्लेषण कर नशीले पदार्थों की तस्करी के हॉटस्पॉट्स की पहचान करेगा।
नशा से दूरी है जरूरी, सफल अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'नशामुक्त मध्य प्रदेश' के विजन को साकार करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले भी प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी" जैसे सफल अभियान चलाए जा चुके हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। यह अभियान न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में नशे के खिलाफ एक नई चेतना भी जागृत करेगा।
डेटा का विश्लेषण, हॉटसॉट्स की पहचान
पुलिस विभाग 'NCORD' और अन्य पोर्टल के माध्यम से डेटा विश्लेषण कर नशीले पदार्थों की तस्करी के हॉटस्पॉट्स की पहचान करेगा।
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