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मप्र में 15 साल पुरानी 899 बसों का संचालन बंद

मप्र में 15 साल पुरानी 899 से अधिक कमर्शियल बसों का परिचालन होगा बंद

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को वैध ठहराया है, जिसमें 15 वर्ष से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को सड़कों से हटाने का निर्णय लिया गया था।

मप्र में 15 साल पुरानी 899 से अधिक कमर्शियल बसों का परिचालन होगा बंद

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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को वैध ठहराया है, जिसमें 15 वर्ष से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को सड़कों से हटाने का निर्णय लिया गया था। कोर्ट ने बस ऑपरेटरों द्वारा दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परिवहन नीति (Transport Policy) और 'स्टेज कैरिज परमिट' से जुड़े निर्णय लेना पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए सरकार के इस आदेश को अवैध नहीं माना जा सकता।

​899 बसों ने पूरी की 15 साल की अवधि

प्रदेश भर में वर्तमान में 899 से अधिक ऐसी कमर्शियल बसें हैं जिन्होंने 15 साल की अवधि पूरी कर ली है और अभी भी सड़कों पर चल रही हैं। अब इन पर कार्रवाई की जाएगी।

​ऑपरेटरों का तर्क, हमारे पास फिटनेस सर्टिफिकेट

बस ऑपरेटरों ने दलील दी थी कि चूंकि उनके पास वैध परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट है और उन्होंने टैक्स जमा किया है, इसलिए उन्हें पुराने नियमों के तहत बसें चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में 15 साल से अधिक पुरानी बसों में

जबलपुर 215, सागर 209, इंदौर 156, भोपाल 62, रीवा 54 हैं। ​पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 193 बसें ऐसी भी हैं जो 18 से 25 साल पुरानी हैं और अभी भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह आदेश यात्री सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सरकार की नई परिवहन नीति को मजबूती प्रदान करता है।

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