मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेश के 6 लाख टैक्स देने वालों के लिए 1 अप्रैल से एक नई व्यवस्था लागू हो रही है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेश के 6 लाख टैक्स देने वालों के लिए 1 अप्रैल से एक नई व्यवस्था लागू हो रही है। स्टेट जीएसटी विभाग अब रिटर्न की जांच की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर रहा है।
दूसरे जोन के अफसर को जिम्मेदारी
अब किसी व्यापारी के रिटर्न की रैंडम जांच (Scrutiny) उसी जोन या डिवीजन का अधिकारी नहीं करेगा जहाँ वह व्यापार स्थित है। इसके बजाय, दूसरे जोन के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। भोपाल जोन के रिटर्न की पड़ताल जबलपुर, इंदौर या ग्वालियर के अधिकारी करेंगे। रिटर्न की जांच के लिए फाइलों का चयन कंप्यूटर के माध्यम से रैंडम (यदृच्छया) किया जाएगा।
बनी रहेगी पारदर्शिता
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर होने वाली संभावित मिलीभगत या पक्षपात को रोकना और टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है। यदि जांच के दौरान कोई गड़बड़ी या टैक्स चोरी पाई जाती है, तो केस दर्ज किया जाएगा और फिर संबंधित जोन में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फेसलेस सुनवाई की भी शुरुआत
इसके साथ अपील की सुनवाई में भी बड़ा तकनीकी बदलाव किया जा रहा है। 1 अप्रैल से अपील की सुनवाई पूरी तरह से 'फेसलेस' होगी। अब करदाताओं, वकीलों या टैक्स प्रैक्टिसनर्स को विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। संबंधित पक्ष जहाँ भी होंगे, वहीं से ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
विशेष स्थिति में ही मिलेंगे
व्यक्तिगत रूप से (Physical Hearing) उपस्थित होने की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी, जिसके लिए लिखित आवेदन देना अनिवार्य होगा। आयकर विभाग (Income Tax) की तर्ज पर इस व्यवस्था को लागू करने वाला मध्य प्रदेश, केंद्र के निर्देश पर 2026 तक इसे पूरी तरह अपनाने वाला राज्य बनेगा। इस नई व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मनमानी की शिकायतों में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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