रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ भाईचारे, सद्भाव और एकता का त्योहार मानते हुए रायपुर का एक मुस्लिम परिवार पिछले तीन दशकों से राखी बनाने और बेचने का काम कर रहा है।
रायपुर: रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ भाईचारे, सद्भाव और एकता का त्योहार मानते हुए रायपुर का एक मुस्लिम परिवार पिछले तीन दशकों से राखी बनाने और बेचने का काम कर रहा है। दानिश आलम और उनका परिवार इस काम के जरिए सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश कर रहा है।
पिता ने शुरू किया था राखी बनाने का काम
दानिश आलम अपने माता-पिता, भाइयों और भाभियों के साथ पिछले 32 वर्षों से राखी बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। इस काम की शुरुआत उनके पिता ने की थी, जिसे अब पूरा परिवार मिलकर आगे बढ़ा रहा है। परिवार रक्षाबंधन से करीब चार महीने पहले ही राखियां बनाने का काम शुरू कर देता है। त्योहार के दौरान परिवार अपनी दुकान के साथ स्टॉल भी लगाता है।
'रक्षाबंधन हर समुदाय को मनाना चाहिए'
दानिश आलम ने कहा कि वह बचपन से राखियां बना रहे हैं। उनके पिता ने यह काम शुरू किया था और तब से उनका परिवार इसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद वह रक्षाबंधन को एक खूबसूरत त्योहार मानते हैं और उनका मानना है कि हर समुदाय के लोगों को इसे मनाना चाहिए।
'मैं पहले भारतीय हूं'
दानिश ने कहा कि जब कुछ लोग उनसे पूछते हैं कि मुस्लिम होने के बावजूद वह राखी क्यों बनाते और बेचते हैं, तो उन्हें यह सवाल समझ नहीं आता। उन्होंने कहा, "मैं एक भारतीय हूं और हर त्योहार को खुशी के साथ मनाता हूं। रक्षाबंधन एक सुंदर त्योहार है।" दानिश ने बताया कि उनकी छह-सात बहनें हैं, जिनमें दूसरे समुदायों से जुड़ी बहनें भी शामिल हैं। हर साल उनकी बहनें उन्हें राखी बांधती हैं और वह उन्हें प्यार से उपहार देते हैं।
परिवार मिलकर बनाता और बेचता है राखियां
दानिश ने बताया कि उनकी अपनी दुकान है और राखियां घर पर ही बनाई जाती हैं। परिवार का हर सदस्य इसमें योगदान देता है। रक्षाबंधन के दौरान परिवार मिलकर स्टॉल लगाता है और राखियां बेचता है। दानिश की पत्नी निगार आलम ने कहा कि रक्षाबंधन केवल हिंदू समुदाय का त्योहार नहीं है और सभी लोग इसे मिलकर मना सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों के लोगों को रक्षाबंधन साथ मनाना चाहिए, क्योंकि यह त्योहार बहुत कुछ सिखाता है और भाई-बहन के बीच गहरे प्रेम का प्रतीक है। निगार ने कहा कि संकीर्ण सोच रखने वाले लोग ही त्योहारों को हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बांटते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, जिनमें दूसरे धर्मों से जुड़े भाई भी शामिल हैं।
'पूरा परिवार उत्साह से मनाता है रक्षाबंधन'
दानिश की मां अंजुम आलम ने भी बताया कि उनका पूरा परिवार हर साल रक्षाबंधन का त्योहार बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाता है। रायपुर का यह परिवार पिछले 32 वर्षों से राखी बनाने के अपने काम के जरिए न सिर्फ अपनी रोजी-रोटी चला रहा है, बल्कि भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश भी दे रहा है।
(एएनआई)
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