बरही। मध्य प्रदेश सरकार 'श्रीराम वन गमन पथ' परियोजना का विस्तार करने जा रही है। अब...
बरही। मध्य प्रदेश सरकार 'श्रीराम वन गमन पथ' परियोजना का विस्तार करने जा रही है। अब इस मार्ग में 10 नए स्थलों को शामिल किया जाएगा, जिससे प्रदेश में कुल चिह्नित स्थानों की संख्या 25 से बढ़कर 35 हो जाएगी।
श्री राम ने जहां तीर्थ दर्शन किये थे, वे स्थल जुड़ेंगे
नए स्थलों का चयन: नए जोड़े जाने वाले स्थलों में वे स्थान शामिल हैं जहां भगवान श्रीराम अयोध्या का राजा बनने के बाद गए थे या जहाँ उन्होंने तीर्थ दर्शन किए थे। श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के डॉ. राम अवतार ने 48 वर्षों के शोध के बाद इन स्थलों को चिह्नित किया है। उनके शोध को भारत सरकार ने भी मान्यता दी है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विकास होगा, सहुलियत होगी
राज्य सरकार इन सभी स्थलों को पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से विकसित करेगी ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता हो।
इन स्थानों की हो रही खोज
कुछ प्रमुख क्षेत्रों में नए स्थलों की पहचान की गई है, उसमें उमरिया-कटनी जिला में बरही के पास घघौआ पहाड़ के पास के स्थलों की पहचान की जा रही है। मान्यता है कि यहाँ के शिव मंदिर में भगवान राम ने पूजा की थी। अनूपपुर-डिंडोरी वह स्थल है जहां के बारे में स्थानीय मान्यता है कि श्रीराम के चरण पड़े थे। जबलपुर क्षेत्र में नर्मदा तट के पास 'रामघाट' और 'राम पिपरिया' जैसे स्थलों को भी इस पथ से जोड़ने की योजना है।
चिन्हित सथलों को एक सूत्र में पिरोने का लक्ष्य
इस परियोजना का लक्ष्य उन सभी रास्तों और विश्राम स्थलों को एक सूत्र में पिरोना है जहाँ से भगवान राम वनवास के दौरान गुजरे थे। चित्रकूट से लेकर अमरकंटक तक फैले इस मार्ग को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ 'धार्मिक सर्किट' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सतना में है सुतीक्ष्ण आश्रम
सतना जिले के सुतीक्ष्ण आश्रम में विराजित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता की प्रतिमाएं इस पथ की प्राचीनता और श्रद्धा का केंद्र हैं।
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