प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

कोडीन कफ सिरप मामला

शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली पुरसवानी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, पुलिस की छापेमारी जारी

कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में आरोपी वैशाली पुरसवानी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली पुरसवानी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी पुलिस की छापेमारी जारी

ACP Kotwali Vijay Pratap Singh |

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। एक अदालत ने नवंबर में कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज कोडीन कफ सिरप मामले के सिलसिले में शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली पुरसवानी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। कोतवाली के ACP विजय प्रताप सिंह ने कहा कि पुलिस पुरसवानी को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।

लगभग 31 करोड़ रुपये की आठ अचल संपत्तियां फ्रीज

ANI से बात करते हुए ACP ने कहा, "देखिए, नवंबर में कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज कोडीन कफ सिरप मामले में पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर लगातार कार्रवाई चल रही थी। इसी सिलसिले में शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली पुरसवानी का नाम सामने आया, जिनके खिलाफ अदालत ने NBW (गैर-जमानती वारंट) जारी किया है और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। फिलहाल, पुलिस इस मामले में लगातार छापेमारी कर रही है।" इस साल जनवरी में, वाराणसी पुलिस ने कफ सिरप के अवैध व्यापार से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी भोला जायसवाल और अन्य लोगों की लगभग 31 करोड़ रुपये की आठ अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था।

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस क्ट के तहत संपत्तियां ज़ब्त

वरुणा ज़ोन की ADCP नीतू काद्यान के अनुसार, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत ये संपत्तियां ज़ब्त की गईं। पिछले साल नवंबर में भोला जायसवाल, उनके बेटे शुभम जायसवाल और अन्य लोगों के पास से भारी मात्रा में कफ सिरप मिलने के बाद उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था। 22 दिसंबर, 2025 को, कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले की जांच कर रही UP पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

नेपाल सीमा के पास मदरसों के ख़िलाफ़ कार्रवाई

रिपोर्ट में एक ऐसे क्रॉस-बॉर्डर सिंडिकेट का पता चला है जिसमें दवाइयों की खेप का गलत इस्तेमाल, हवाला ट्रांज़ैक्शन और आपराधिक नेटवर्क से संबंध शामिल हैं। SIT रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट के कथित सरगना विभोर राणा को 2016 में लाइसेंस मिला था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कफ सिरप बनाने और बेचने वाली कंपनियों को लाइसेंस अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए थे। SIT ने बताया कि नेपाल सीमा के पास मदरसों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई का सीधा असर तस्करी के काम पर पड़ा, जिससे विभोर और उसके साथियों को कुछ समय के लिए सीमा पार तस्करी रोकनी पड़ी।

(इनपुटः ANI)

यह भी पढ़ेंः एशियाई खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दी बधाई और शुभकामनाएं

Related to this topic: