AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में फर्जी फॉर्म-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की बड़ी साजिश का आरोप लगाया है।
हैदराबाद (तेलंगाना)। तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा 5 अक्टूबर को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन (मेमो) का हवाला देते हुए, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से सूची से हटाने के बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश करने का दावा किया है। यह मामला चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों के हनन को लेकर राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है।
गोशामहल में मतदाता सूची से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद संसदीय क्षेत्र के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने के लिए एक "सोची-समझी साजिश" का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि फर्जी और थोक में फॉर्म-7 जमा कराकर वैध मतदाताओं के नाम सूची से गायब करने का सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मेमो का दिया हवाला
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए, हैदराबाद के सांसद ने राज्य चुनाव प्राधिकारी द्वारा हाल ही में जारी उस आधिकारिक संचार का जिक्र किया, जिसमें फर्जी कागजातों के आधार पर वैध मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयासों पर गंभीर आपत्ति जताई गई थी।
ओवैसी ने कहा, "तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 5 अक्टूबर को एक मेमो जारी किया है, जिसमें ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) कमिश्नर, सभी जिला कलेक्टरों और निर्वाचन अधिकारियों का ध्यान निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के समक्ष फॉर्म-7 के जरिए थोक में आवेदन दाखिल होने के मामलों की ओर आकर्षित किया गया है। मेमो में स्पष्ट किया गया है कि ये आवेदन वास्तविक नहीं हैं। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि झूठे बयान देने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1900 के नियम 20 के तहत विस्तृत जांच कराई जाए।"
बूथ नंबर 28 पर सुनियोजित तरीके से नाम हटाने का दावा
AIMIM प्रमुख ने प्रेस के सामने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए आरोप लगाया कि गोशामहल विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 28 पर अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र मतदाताओं के नाम सूची से काटने के लिए एक लक्षित अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "हम निर्वाचन आयोग के समक्ष गोशामहल विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 28 का एक ठोस उदाहरण रख रहे हैं। एक सोची-समझी योजना के तहत 122 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए पहले से मुद्रित (प्री-प्रिंटेड) फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए थे। इस आवेदन में आवेदक का नाम टिड्डू मूर्ति जनार्दन के रूप में दर्ज है, जिसका फोन नंबर भी फॉर्म पर अंकित है और वह भाजपा समर्थक है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन 122 नामों को हटाने का निशाना बनाया गया, वे सभी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जबकि ये मतदाता वर्ष 2002 से लगातार चुनावी सूची में शामिल रहे हैं और नवीनतम ड्राफ्ट सूची में भी मौजूद थे।"
85 वर्षीय बुजुर्ग का उदाहरण देकर उठाया सवाल
मतदाता के नाम हटाने के इन प्रयासों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए ओवैसी ने एक स्थानीय वरिष्ठ नागरिक का उदाहरण दिया, जिनका नाम भी सूची से हटाने के लिए दिए गए आवेदनों में शामिल था।
उन्होंने कहा, "फॉर्म-7 के जरिए जिन्हें निशाना बनाया गया है, उनमें 85 वर्षीय सम्मानित नागरिक मिर्जा फारूक बेग भी शामिल हैं, जो यहीं पैदा हुए थे और अपने 15 सदस्यीय परिवार के साथ रहते हैं। पूरा मोहल्ला उन्हें अच्छी तरह जानता है। उनका नाम दशकों से लगातार मतदाता सूची में आता रहा है, जिसमें वर्ष 2002 और हालिया ड्राफ्ट सूची भी शामिल है। इसके बावजूद उनके मताधिकार को रद्द करने के लिए एक फर्जी फॉर्म-7 जमा किया गया।"
चुनाव आयोग से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग
असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से आग्रह किया है कि वह इन फर्जी दावों के पीछे के चेहरों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करे। साथ ही, उन्होंने समय रहते इन फॉर्मों को पकड़ने वाले स्थानीय बूथ अधिकारियों की सराहना की।
उन्होंने आगे कहा, "हम मांग करते हैं कि निर्वाचन आयोग तेलंगाना के CEO के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करे। झूठी घोषणाएं करने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और नियम 20 के तहत जांच के आदेश दिए जाएं। मैं बूथ नंबर 28 पर तैनात सतर्क बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इन फर्जी फॉर्मों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, और अपनी पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) की भी सराहना करता हूं जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए इन दस्तावेजों को सुरक्षित किया।"
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