यूपी त्रिस्तरीय - पंचायत चुनावों में मतपत्रों पर नोटा विकल्प और प्रत्याशियों के नाम न होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्र, राज्य सरकार और EC आयोग को नोटिस जारी कर मांगा है।
Petition regarding implementation of NOTA and name of candidate on ballot paper in Panchayat elections in UP |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय - पंचायत चुनावों में मतपत्रों (बैलट पेपर) पर नोटा विकल्प और प्रत्याशियों के नाम न होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्र, राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायालय ने जवाबी हलफनामे के लिए दिया चार सप्ताह का समय
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने अधिवक्ता सुनील कुमार मौर्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
पिटीशन में शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के बीच भेदभाव का आरोप
याचिका में तर्क दिया गया है कि मौजूदा व्यवस्था में बैलेट पेपर पर सिर्फ चुनाव चिह्न होते हैं, नाम नहीं। इससे मतदाताओं में भ्रम पैदा होता है। याची ने कोर्ट में दायर पिटीशन में शहरी और ग्रामीण मतदाताओं में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग शहरी निकाय के चुनावों में तो नोटा का विकल्प देता है, लेकिन ग्रामीण (पंचायत) मतदाताओं को इससे वंचित रखा गया है। पंचायत चुनावों में नोटा का विकल्प न होना मतदाताओं के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह ग्रामीण मतदाताओं के साथ भेदभाव है।
प्रशासनिक कठिनाई को आधार बनाकर मौलिक अधिकारों का हनन गलत: याची अधिवक्ता
याची अधिवक्ता ने बताया कि याचिका में एक आरटीआई के जवाब का हवाला दिया गया है। इसमें 20 अगस्त 2025 को राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि पंचायत चुनाव में लगभग 55-60 करोड़ मतपत्र छपते हैं और समय कम होता है, इसलिए नोटा और नाम छापना संभव नहीं है। याची ने इस तर्क को असांविधानिक बताते हुए चुनौती दी है और कहा है कि प्रशासनिक कठिनाई को आधार बनाकर मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
याची ने कोर्ट से, राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर पर प्रत्याशी का नाम और नोटा का कॉलम शामिल करने के निर्देश देने का आग्रह किया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
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