कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खर्गे ने शुक्रवार को वंदे मातरम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर भाजपा और आरएसएस पर तीखा पलटवार किया।
बेंगलुरु: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खर्गे ने शुक्रवार को वंदे मातरम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर भाजपा और आरएसएस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे स्वतंत्रता सेनानी भी राष्ट्रविरोधी थे, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों के गायन का समर्थन किया था।
खर्गे ने भाजपा से पूछा- क्या गांधी-नेहरू भी राष्ट्रविरोधी थे?
खर्गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1937 में गांधीजी, सरदार पटेल, नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर समेत कई नेताओं ने वंदे मातरम के किन हिस्सों को सार्वजनिक रूप से गाया जाना चाहिए, इस पर विचार-विमर्श किया था। उन्होंने सवाल किया, "तो क्या अब वे सभी 'राष्ट्र-विरोधी' हैं?"
भाजपा पर राष्ट्रीय प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
प्रियांक खर्गे ने भाजपा पर राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल कर लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर उठाया जा रहा विवाद देश में बेरोजगारी, आर्थिक चुनौतियों, पेपर लीक और अन्य गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है। यह प्रतिक्रिया भाजपा द्वारा कांग्रेस नेताओं, जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और सोनिया गांधी शामिल हैं, पर दिल्ली और गोवा में पार्टी कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रगान का "अधूरा" संस्करण गाने का आरोप लगाए जाने के बाद आई है।
आरएसएस को दी वंदे मातरम को लेकर चुनौती
खर्गे ने भाजपा और आरएसएस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वंदे मातरम को लेकर इतने गंभीर हैं तो इसकी शुरुआत अपनी शाखाओं से करें। उन्होंने कहा कि आरएसएस की दैनिक शाखाओं में गाए जाने वाले "नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि" की जगह वंदे मातरम का पाठ किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को भी वंदे मातरम का पूरा पाठ बिना किसी सहायता के करने की चुनौती दी। खर्गे ने सवाल किया कि देश को उपदेश देने से पहले भाजपा के कितने नेता वंदे मातरम का पूरा पाठ कर सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा पाठ करने की चुनौती दी।
बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल
प्रियांक खर्गे ने कहा कि देश में बेरोजगारी, युवाओं के रोजगार, पेपर लीक और परीक्षाओं के सुचारू संचालन जैसे मुद्दों पर ऐसी चिंता क्यों नहीं दिखाई जाती। उन्होंने पीएम केयर्स फंड से जुड़े सवालों और अन्य राजनीतिक मुद्दों का भी जिक्र किया। खर्गे ने आरोप लगाया कि जब सरकार के लिए जवाबदेही का मुद्दा असहज होता है, तब विवाद खड़ा कर बातचीत का रुख बदलने की कोशिश की जाती है।
1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का दिया हवाला
खर्गे और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने अपने पक्ष में 28 अक्टूबर, 1937 को कोलकाता में पारित ऐतिहासिक प्रस्ताव का हवाला दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम के सार्वजनिक गायन को लेकर नेताओं के बीच चर्चा हुई थी। राष्ट्रीय एकता और सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक सभाओं में गीत के केवल पहले दो छंद गाने का निर्णय लिया गया था।
कांग्रेस ने 1937 के फैसले को फिर दोहराया
कांग्रेस कार्य समिति ने बुधवार को अपने 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए फैसला किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। प्रियांक खर्गे ने कहा कि कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक मानक का लगातार पालन किया है और वह ऐसे संगठनों से देशभक्ति का प्रमाणपत्र नहीं मांगती, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया था।
(ANI)
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