मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगले दो दशकों की युद्ध संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस राह में चुनौतियां होंगी, लेकिन देश का संकल्प अडिग है। राजसिंह ने कहा कि भारत अगले दो दशकों के युद्ध को ध्यान में रखते हुए अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है। पाकिस्तान की ओर परोक्ष इशारा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हमारा पड़ोसी देश आतंकवाद को सरकार की नीति के रूप में जारी रखता है, तब तक भारत उसके खिलाफ हर तरह की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
राजनाथ सिंह ने गिनाए आधुनिक युद्ध के नए आयाम
बता दें, राजनाथ सिंह एनडीटीवी रक्षा सम्मेलन के एक सेशन को संबोधित कर रहे थे। इस सेशन में थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज का युद्ध केवल सैनिक बनाम सैनिक का मामला नहीं है, बल्कि यह कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सूचना युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन और सटीक मारक हथियार शामिल हैं।
समावेशी विकास और तकनीकी ताकत पर राजनाथ का जोर
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत एक ऐसी सभ्यतागत शक्ति है, जिसका उदय टकराव या व्यवधान के बजाय समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य बिना किसी विघटन के आगे बढ़ना और संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव लाना है। अपने संबोधन के दौरान सिंह ने यह भी कहा कि जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा, उसे युद्ध के मैदान में बढ़त हासिल होगी। उन्होंने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति के साथ-साथ सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए उठाए गए कुछ कदमों को भी रेखांकित किया।
भारत के उत्थान का लक्ष्य समावेशी विकास
विश्व व्यवस्था में भारत की स्थिति पर राजनाथ सिंह ने कहा, मेरा मानना है कि हम एक सभ्यतागत शक्ति हैं। हमारे उत्थान का उद्देश्य किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ना या मौजूदा व्यवस्था को खत्म करना नहीं है, बल्कि यह सामूहिक और समावेशी विकास के बारे में है। हमारा लक्ष्य है- बिना विघटन के उत्थान, संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव। उन्होंने कहा, हम ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं, जहां भारत आगे बढ़े और पूरी दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े।
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