भोपाल। पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले...
भोपाल। पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले 'गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल' में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सीबीआई ने इस मामले में इंदौर की एक कंपनी और रेलवे के कुछ अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
नियम से 99.9% शुद्ध चांदी होनी चाहिए, निकला 0.23 फीसदी
रेलवे कर्मचारियों को जो चांदी के सिक्के (मेडल) दिए गए थे, उनमें चांदी की मात्रा मात्र 0.23% पाई गई, जबकि 99.80% तांबा निकला। नियमों के अनुसार, इसमें 99.9% शुद्ध चांदी होनी चाहिए थी। रेलवे ने इंदौर की कंपनी M/s Viable Diamonds के साथ जनवरी 2023 में 3,640 मेडल की सप्लाई का अनुबंध किया था। इसकी कुल लागत लगभग 49.68 लाख रुपये थी।
इंजीनियर की रिपोर्ट पर मेडल बांटे गये
अनुबंध की शर्तों के मुताबिक RITES के इंजीनियरों ने पहले जांच की थी और रिपोर्ट में इन्हें 'शुद्ध चांदी' बताया था। इसी आधार पर मेडल बांटे गए।
ऐसे हुई धोखाधड़ी की पुष्टि
जब कुछ रिटायर्ड कर्मचारी पैसों की जरूरत पड़ने पर इन सिक्कों को बेचने बाजार पहुंचे, तो जौहरियों ने बताया कि ये सिक्के चांदी के नहीं बल्कि तांबे के हैं। इसके बाद रेलवे विजिलेंस ने सैंपल की दोबारा जांच कराई, जिसमें धोखाधड़ी की पुष्टि हुई।
CBI ने 420, 468 व कई धारा में केस दर्ज किया
सीबीआई ने 25 मार्च 2026 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की। इसमें धोखाधड़ी (420), जालसाजी (468) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
20 साल पुरानी परंपरा बंद
इस घोटाले के सामने आने के बाद, रेलवे बोर्ड ने सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को मेडल देने की 20 साल पुरानी परंपरा को बंद करने का फैसला किया है। अब कर्मचारियों को मेडल की जगह प्रमाण पत्र या नकद राशि देने पर विचार किया जा रहा है।
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