मुरैना। चंबल अभयारण्य में बेखौफ रेत माफिया द्वारा एक वनरक्षक की हत्या के मामले ने अब देश की शीर्ष अदालत का ध्यान खींचा है।
मुरैना। चंबल अभयारण्य में बेखौफ रेत माफिया द्वारा एक वनरक्षक की हत्या के मामले ने अब देश की शीर्ष अदालत का ध्यान खींचा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई का फैसला किया है।
यह है मामला
ड्यूटी पर तैनात वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकने की कोशिश के दौरान कुचल दिया गया।
अत्यंत गंभीर घटना
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस घटना को अत्यंत गंभीर माना है। कोर्ट ने कहा कि वह अवैध खनन रोकने के लिए जल्द ही व्यापक और कड़े निर्देश जारी करेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को तय की गई है।
एक्शन मोड में प्रशासन
वनरक्षक की हत्या के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। संयुक्त टीम ने दबिश देकर 8195 ट्रॉली अवैध रेत नष्ट की है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.63 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बाद रेत माफिया भूमिगत हो गए हैं। मुरैना के बैरियर चौराहे पर लगने वाली अवैध रेत मंडी गुरुवार को पूरी तरह सूनी रही।
शहीद का दर्जा देने की मांग
वन विभाग ने प्रशासन को पत्र लिखकर हरिकेश गुर्जर को 'शहीद' का दर्जा देने की मांग की है।
रेत माफिया की तुलना डकैतों से
मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) रूपाली सैमुअल ने कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में रेत माफियाओं की तुलना 'डकैतों' से की थी और शासन को कड़ी चेतावनी दी थी कि चंबल के पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। अंबाह पुलिस ने ट्रैक्टर चालक विनोद कोरी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। मामले में कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
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