कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के तहत विचाराधीन वोटरों के मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदार होने के लिए 6 अप्रैल को नामांकन किया जाना है, उन क्षेत्रों में विचाराधीन वोटरों के नामों को नामांकन की तारीख के पहले जारी करना होगा।
पश्चिम बंगाल में ही समस्या पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में ही वोटरों को लेकर क्यों समस्या देखी जा रही है जब कि पश्चिम बंगाल की तुलना में एसआईआर वाले दूसरे राज्यों में ज्यादा संख्या में वोटरों का नाम हटा है। इस पर चुनाव आयोग ने आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) में कमी होने की बात कही और सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में एक रिपोर्ट भी दी। सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई पहली अप्रैल को करेगा।
लाखों विचाराधीन वोटरों को लेकर उठी चिंता
मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार को देर रात करीब 60 लाख विचाराधीन वोटरों में से करीब 29 लाख विचाराधीन वोटरों के नाम जारी करने की और राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का ध्यान दिलाते हुए कहा गया कि विचाराधीन वोटरों में से कितने वोटरों को शामिल किया है और कितने वोटरों को हटाया गया, स्पष्ट नहीं है।
नामांकन प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
सरकार की ओर से इस समस्या की ओर भी ध्यान खींचा गया कि उम्मीदवारों के नामांकन की तारीख के पहले तक सभी विचाराधीन वोटरों के मामले का निपटारा नहीं हुआ और वोटरों के नामों की लिस्ट जारी नहीं हो पाई तो समस्या होगी। विचाराधीन वोटरों में से कोई उमीदवरा होना चाहे तो क्या होगा।
चुनाव आयोग को जल्द कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में 6 अप्रैल को नामांकन होना है, उन विधानसभा क्षेत्रों के विचाराधीन वोटरों के मामले को पहले निपटाया जाए ओर वोटरों के नामों को जारी किया जाए। चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों का सहयोग करे।
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