भोपाल। राजधानी के एक डिफेंस ऑफिसर की शादी साल 2023 में अरेंज मैरिज में हुई थी। शादी के बाद दोनों की जिंदगी खुशहाल और सामान्य थी।
भोपाल। राजधानी के एक डिफेंस ऑफिसर की शादी साल 2023 में अरेंज मैरिज में हुई थी। शादी के बाद दोनों की जिंदगी खुशहाल और सामान्य थी। शादी के दो साल बाद भी उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ, तो डॉक्टर से सलाह लेने का फैसला किया। जब महिला की मेडिकल जांच और टेस्ट कराए गए, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने सबको हैरान कर दिया। जांच में पता चला कि पत्नी के शरीर में पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम मौजूद हैं।
एंड्रोजन इनसेंसिटिविटी सिंड्रोम में दिखती महिला है पर जेनेटिकली अलग
मेडिकल भाषा में इसे अक्सर 'एंड्रोजन इनसेंसिटिविटी सिंड्रोम' (Androgen Insensitivity Syndrome) जैसी स्थितियों से जोड़कर देखा जाता है, जहाँ व्यक्ति बाहरी तौर पर महिला दिखती है लेकिन जेनेटिक संरचना अलग होती है। इस सच्चाई के सामने आने के बाद आमतौर पर परिवारों में विवाद या अलगाव की स्थिति बन जाती है, लेकिन यहाँ मामला अलग रहा। डिफेंस ऑफिसर पति ने अपनी पत्नी का साथ छोड़ने के बजाय एक मिसाल पेश की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा— "मैं उम्रभर साथ निभाऊंगा।" पति ने इस स्थिति को स्वीकार किया और पत्नी को पूरा भावनात्मक समर्थन देने का वादा किया है।
आपसी प्यार व समझ मेडिकल रिपोर्ट से ऊपर
यह मामला न केवल मेडिकल साइंस के नजरिए से दुर्लभ है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक गहरा संदेश देता है कि आपसी प्यार और समझ किसी भी मेडिकल रिपोर्ट से ऊपर होती है। सामान्यतः, महिलाओं में XX क्रोमोसोम और पुरुषों में XY क्रोमोसोम होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में, एक व्यक्ति आनुवंशिक (genetically) रूप से पुरुष (XY) होता है, लेकिन उसका शरीर महिला के रूप में विकसित होता है।
ऐसा क्यों होता है
एंड्रोजन इनसेंसिटिविटी सिंड्रोम (AIS) में व्यक्ति के पास XY क्रोमोसोम होते हैं और शरीर में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) भी बनता है, लेकिन शरीर की कोशिकाएं उस हार्मोन पर प्रतिक्रिया नहीं करतीं। इसके परिणामस्वरूप, बच्चा बाहरी तौर पर पूरी तरह लड़की जैसा दिखता है और उसकी परवरिश भी लड़की की तरह होती है।
यह स्थिति बनती है
स्वयर सिंड्रोम (Swyer Syndrome में XY क्रोमोसोम होने के बावजूद 'SRY जीन' (जो पुरुष अंगों को विकसित करता है) काम नहीं करता। इस कारण शरीर में पुरुष अंग नहीं बनते और व्यक्ति में गर्भाशय (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब जैसी महिला संरचनाएं विकसित हो सकती हैं, लेकिन अंडाशय (Ovaries) ठीक से काम नहीं करते।
इसके लक्षण और पहचान
ज्यादातर मामलों में, इस स्थिति का पता तब तक नहीं चलता जब तक कि लड़की की उम्र बढ़ने पर भी मासिक धर्म (Periods) शुरू न हों। या शादी के बाद गर्भधारण (Pregnancy) में समस्या आए। बाहरी दिखावट पूरी तरह से महिला (Female appearance) होती है, आंतरिक अंग अक्सर अंडाशय (Ovaries) की जगह अविकसित ऊतक होते हैं। प्रजनन क्षमता प्राकृतिक रूप से गर्भधारण मुश्किल होता है, लेकिन आधुनिक तकनीक (जैसे Egg Donation) से कुछ मामलों में गर्भधारण संभव हो सकता है।
सामाजिक और भावनात्मक पहलू
यह पूरी तरह से एक बायोलॉजिकल स्थिति है। यह किसी व्यक्ति की पहचान या स्त्रीत्व को कम नहीं करती। भोपाल के इस मामले में पति का सहयोग सराहनीय है क्योंकि ऐसी स्थिति में हार्मोन थेरेपी और काउंसलिंग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT)
चूंकि XY क्रोमोसोम वाली महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) ठीक से विकसित नहीं होते, इसलिए उनके शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) जैसे महिला हार्मोन की कमी हो सकती है। डॉक्टरों द्वारा हार्मोन की दवाएं दी जाती हैं ताकि हड्डियां मजबूत रहें (Osteoporosis से बचाव) और शरीर में महिला विशेषताओं का विकास सही बना रहे। इससे त्वचा, बाल और सामान्य ऊर्जा का स्तर बेहतर रहता है।
गर्भधारण (Pregnancy) की संभावना
यह सबसे संवेदनशील हिस्सा है। प्राकृतिक रूप से ऐसी महिलाएं अंडे (Eggs) नहीं बना पातीं, लेकिन गर्भाशय (Uterus) की स्थिति के आधार पर विकल्प मौजूद होते हैं। यदि महिला का गर्भाशय (Uterus) मौजूद और स्वस्थ है, तो किसी डोनर के अंडे और पति के स्पर्म की मदद से IVF (In-Vitro Fertilization) के जरिए वह गर्भधारण कर सकती हैं और बच्चे को जन्म दे सकती हैं। यदि गर्भाशय विकसित नहीं है, तो सरोगेसी एक प्रभावी विकल्प होता है।
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