नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और तोडफ़ोड़ की घटनाओं के मामले में यूपी पुलिस और एसटीएफ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है।
नोएडा (यूपी)। नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और तोडफ़ोड़ की घटनाओं के मामले में यूपी पुलिस और एसटीएफ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को नोएडा हिंसा का मास्टर माइंड बताया और कहा कि उसी ने श्रमिक आंदोलन को हिंसा में बदलने का पूरा प्लान तैयार किया था।
बिहार के वैशाली का रहने वाला है आरोपी आदित्य आनंद
उत्तर प्रदेश की पुलिस और एसटीएफ ने गौतमबुद्धनगर जिले के नोएडा शहर में 13 अप्रैल को औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के प्रदर्शन में तोड़फोड़ और हिंसा के मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ रस्टी (28) को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। वह बिहार के वैशाली का रहने वाला है और सेक्टर-37 अरुण विहार में किराये के फ्लैट में रहता था।
साथियों की पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी
नोएडा पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ गतिविधियों और हिंसक घटनाओं के संचालन में आदित्य आनंद की प्रमुख भूमिका थी। पुलिस ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। पुलिस ने बताया कि आदित्य मजदूर बिगुल संगठन से जुड़ा था। आदित्य के साथी और हिंसा के दो अन्य साजिशकर्ता रूपेश रॉय और मनीषा चौहान को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। मनीषा गोपालगंज और रूपेश छपरा का रहने वाला है।
गुप्त बैठकों में रची गई थी हिंसा की साजिश
आदित्य आनंद को लेकर यूपी एसटीएफ ने कई सनसनीखेज दावे किए हैं। आदित्य ने श्रमिकों की सभा में भाषण दिया था। इस सभा की फोटो और वीडियो को देखने के बाद ही उसका नाम पुलिस की जांच में सामने आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार एसटीएफ की जांच और शुरुआती पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि इसके फ्लैट पर 30 मार्च से 1 अप्रैल तक कई बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में मजदूर बिगुल, दिशा संगठन, आरडब्ल्यूपीआई, नौजवान भारत सभा व एकता संघर्ष समिति गौतमबुद्ध नगर के सदस्य कई बार जुटे थे। इन बैठकों में ही श्रमिकों को प्रदर्शन के लिए उकसाने और प्रदर्शन को उग्र बनाने की साजिश रची गई थी।
डिजिटल माध्यम से तैयार किया गया हिंसा का पूरा प्लान
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि हिंसा पहले से प्लान की गई थी। 30 मार्च से 1 अप्रैल 2026 के बीच नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में आरोपी आदित्य आनंद के घर पर कई गुप्त बैठकें हुईं थीं। इन बैठकों में मजदूर बिगुल, दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी (RWPI), नौजवान भारत सभा (NBS) और एकता संघर्ष समिति जैसे संगठनों के सदस्य शामिल थे। इन संगठनों ने श्रमिक आंदोलन के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की साजिश रची थी। आदित्य आनंद ने डिजिटल माध्यमों और गुप्त बैठकों के जरिए उपद्रव का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया था।
क्रांतिकारी मजदूर संगठन से जुड़ा ऐक्टिविस्ट है आरोपी आदित्य
एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि आदित्य आनंद सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं क्रांतिकारी मजदूर संगठन से जुड़ा ऐक्टिविस्ट है। उसने एनआईटी जमशेदपुर से वर्ष 2020 में बी. टेक की डिग्री प्राप्त की थी और उच्च शिक्षित सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उसका चयन "जेनपैक्ट" कंपनी में हुआ था, जहां उसने नोएडा और गुरुग्राम में काम किया। पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2022 में फेसबुक के जरिए ‘मजदूर बिगुल’ से जुड़ा और धीरे-धीरे क्रांतिकारी विचारधारा की ओर आकर्षित हो गया।
तकनीकी सर्विलांस से पकड़ में आया आरोपी
एसटीएफ ने बताया कि हिंसा के बाद पुलिस आदित्य की तलाश कर रही थी। बीते 16 अप्रैल को गौतमबुद्धनगर न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह भागकर चेन्नई पहुंचा और वहां से त्रिच्चुरापल्ली जा रहा था। एसटीएफ नोएडा इकाई ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे तमिलनाडु से 18 अप्रैल की रात 1:40 बजे रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसे ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया गया है।
आदित्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं 191(1), 191(2), 115(2), 121(1), 121(2), 125(1), 351(3), 352, 61(2) तथा 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
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