भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग और कचरा प्रबंधन में लापरवाही को लेकर...
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग और कचरा प्रबंधन में लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि कचरा प्रबंधन की समस्या केवल एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम देश भर में लागू करें
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम) को केवल भोपाल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
नगर निगम पर लगा था जुर्माना
नगर निगम पर जुर्माना: इससे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कचरा प्रबंधन के नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के लिए भोपाल नगर निगम पर ₹1.80 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया था।
अधिकारियों को प्रतिवादी बनाने के निर्देश
कोर्ट ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए अब केंद्र और राज्य सरकार के कई उच्च अधिकारियों को भी इसमें प्रतिवादी (Respondents) बनाने का निर्देश दिया है, ताकि जमीनी स्तर पर नियमों के पालन की कमी के कारणों की जांच की जा सके।
बुनियादी ढाचा में बदलाव जरूरी
जमीनी हकीकत पर चिंता: जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने कहा कि नियम तो बार-बार बदले जाते हैं (जैसे 2000, 2016 और अब 2026), लेकिन जब तक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार नहीं होगा, तब तक जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी।
कचरे को चार श्रेणी में बांटें
विशेषज्ञों के अनुसार, इन नए नियमों में कचरे को चार श्रेणियों (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष कचरा) में बांटना अनिवार्य किया गया है। कोर्ट ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल 2026 से इन नियमों के प्रभावी होने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
कचरा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐतिहासिक है, क्योंकि यह कचरा प्रबंधन को लेकर देशव्यापी जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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