लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का मामला एक बार फिर अधर में लटकता नजर आ रहा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का मामला एक बार फिर अधर में लटकता नजर आ रहा है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य में कार्यवाहक के स्थान पर पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति के लिए भेजा गया प्रस्ताव आपत्तियों के साथ वापस कर दिया गया है। ऐसे में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति में और समय लग सकता है।
यूपीएससी ने लौटाया प्रस्ताव
यूपीएससी ने योगी सरकार के प्रस्ताव को 2025 की नई गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं होने और अपूर्ण जानकारी का उल्लेख करते हुए लौटा दिया है। राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी के लिए 1990-1996 बैच के वरिष्ठ अधिकारियों की सूची भेजी थी, लेकिन अब उसे नए दिशा-निर्देशों के तहत विवरण दुरुस्त कर दोबारा प्रक्रिया अपनानी होगी।
नए प्रारूप में फिर भेजना होगा प्रस्ताव
यूपीएससी ने यूपी के मुख्य सचिव को प्रस्ताव लौटाते हुए 2025 में बनी गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बाबत दिए गए फैसलों के मुताबिक नए प्रारूप में प्रस्ताव तैयार कर दोबारा भेजने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में स्थायी डीजीपी की तैनाती के लिए संघ लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य कर दिया है। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने भी संघ लोक सेवा आयोग को स्थायी डीजीपी की तैनाती के बाबत प्रस्ताव (पैनल) भेजा था। शासन स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
वरिष्ठता को लेकर उठे सवाल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आयोग ने इसे वापस करते हुए पूछा है कि वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण को बीते वर्ष जून माह में यह जिम्मेदारी सौंपने से पहले उनसे वरिष्ठ अधिकारियों की कितनी सेवा शेष बची थी। राज्य सरकार अब नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव में 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके आईपीएस अफसरों की सूची तैयार कर यूपीएससी को भेजेगी।
सीनियर अफसरों की स्थिति
मालूम हो कि राजीव कृष्ण जून, 2025 में 11 आईपीएस अधिकारियों को सुपरसीड कर डीजीपी बनाए गए थे। वर्तमान में वह आईपीएस अधिकारियों की वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर हैं। उनसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में 1990 बैच की रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आलोक शर्मा और पीयूष आनंद शामिल हैं। जून के अंत में आलोक शर्मा के सेवानिवृत्त होने पर राजीव कृष्ण का नाम वरिष्ठता सूची में टॉप थ्री में आ जाएगा।
पूरी प्रक्रिया पर लगा ब्रेक
नियमों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग को भेजे पैनल में से वरिष्ठता के आधार पर तीन अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट कर राज्य सरकार को भेजे जाते हैं। इसके बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से किसी एक को डीजीपी नियुक्त करती है। लेकिन इस बार आयोग ने पैनल में ही आपत्ति लगाते हुए उसे वापस कर दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुक गई है।
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