उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के बाद अब विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में व्यापक पुनर्गठन की तैयारी है। इसके तहत बड़े पैमाने पर अभियंताओं के पद समाप्त करने व छंटनी की संभावना है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के बाद अब विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में व्यापक पुनर्गठन की तैयारी है। इसके तहत बड़े पैमाने पर अभियंताओं के पद समाप्त करने व छंटनी की संभावना है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मिले संकेत
पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने तीन दिन पहले हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में रीस्ट्रक्चरिंग के संकेत दिए हैं। इसके तहत पहले चरण में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े करीब 150 पद समाप्त किए जाने की योजना है। इसके अलावा कई मंडलों और खंडों के विलय की भी तैयारी है।
मंडलों के विलय की योजना
राज्य के ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव के तहत गोरखपुर और प्रयागराज मंडल को मिलाकर वाराणसी मंडल, जबकि मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाए जाने की योजना है। अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के मर्जर प्रस्तावित हैं। हालांकि, शीर्ष प्रबंधन इस मुद्दे पर बोलने से बच रहा है।
कर्मचारी संगठनों में हलचल
वहीं, प्रबंधन की मंशा की भनक लगते ही ऊर्जा विभाग से जुड़े संगठन लामबंद होने लगे हैं।
पदों में भारी कटौती का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, अधीक्षण अभियंता के सात से पांच, अधिशासी अभियंता के 22 से 15, सहायक अभियंता के 62 से 30 तथा अवर अभियंता (जेई) के 180 से 80 पद करने का प्रस्ताव है। पदों का यह आंकड़ा वर्तमान पदों से करीब डेढ़ सौ कम है।
निजीकरण का आरोप
इसे देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन ट्रांसमिशन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन के बहाने निजीकरण की कोशिश कर रहा है। भविष्य में नियमित और संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी होगी।
बिजली व्यवस्था पर असर की आशंका
इस योजना के संबंध में कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस फैसले से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान जब मांग अधिक होती है।
आंदोलन की चेतावनी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। इसी क्रम में 12 अप्रैल को लखनऊ में संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
लोड डिस्पैच सेंटर की स्थिति
उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) लखनऊ के तहत मुख्य कंट्रोल रूम और चार एरिया लोड डिस्पैच सेंटर स्थापित है।
स्टाफ की कमी पहले से
इनमें चार पालियों में अभियंताओं की ड्यूटी लगती है। हर पाली में एक अधिशासी तथा तीन सहायक अभियंताओं की ड्यूटी लगती रही है। इस वक्त तीन अभियंताओं की ही ड्यूटी लग रही है। कभी-कभी दो की ही ड्यूटी लगती, क्योंकि यहां के अभियंताओं को अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
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