वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद को लेकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयान पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाक को अपना ट्रैक रिकॉर्ड देखने की नसीहत दी। पूरी खबर...
वाराणसी: शहर की ऐतिहासिक मस्जिद गंज शहीदा के ध्वस्तीकरण के लिए दिये गये नोटिस का वक्त अब खत्म हो गया है। रेलवे प्रशासन का दावा है कि यह मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी है। काशी स्टेशन के विस्तारीकरण में मस्जिद बाधा है। इसलिए रेलवे इसे यहां से हटाना चाहता है। रेलवे ने विस्तारीकरण के लिए पिछले दिनों एक हनुमान मंदिर, मजार और मस्जिद भी ध्वस्त की थी।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने जताई थी चिंता
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी ने वाराणसी की ऐतिहासिक मस्जिद गंज शहीदा के गिराए जाने पर चिंता जताई थी। सोशल मीडिया 'एक्स' पर राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को गिराए जाने और उन्हें मिल रही धमकियों पर गहरी चिंता जताई, जिनमें वाराणसी की 1,000 साल पुरानी मस्जिद गंज शहीदा भी शामिल है। उन्होंने भारत से ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोकने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि इनके टूटने से वहां हमेशा के लिए अराजकता फैलने का खतरा हो सकता है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की अपील की है।
भारत ने जरदारी के बयान के बेतुका बताया
विदेश मंत्रालय ने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को कथित खतरों के बारे में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने उनके बयान को 'बेतुका' बताते हुए कहा कि ज़रदारी को ''भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।''
मानवाधिकार के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड बहुत खराब- MEA
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ''मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में ये टिप्पणियां बेहद बेतुकी हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और प्रताड़ित करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है।''
राष्ट्रपति की टिप्पणी कट्टरता और नफरत की पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित
बयान में आगे कहा गया, ''इस सच्चाई को देखते हुए, राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक जानबूझकर किया गया राजनीतिक हमला माना जा सकता है, जो कट्टरता और नफरत की पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।''