शाजापुर के ग्राम चौकी मुरादाबाद में ग्रामीणों और युवाओं ने मृत वानर राज का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। दस दिन का शोक मनाकर मुंडन, पिंडदान और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
शाजापुर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम चौकी मुरादाबाद में बेजुबान जीव के प्रति अगाध श्रद्धा, इंसानियत और सनातन संस्कृति की एक अनूठी व प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली है। गाँव के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर प्रांगण में करीब 10 दिन पूर्व एक वानर की अज्ञात कारणों से मृत्यु हो गई थी। मंदिर परिसर में वानर राज का शव मिलते ही पूरे गाँव में शोक की लहर दौड़ गई।
हनुमान जी का स्वरूप मानकर विधि-विधान से तय किया अंतिम संस्कार
सनातन धर्म में वानर को भगवान श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है, इसी आस्था का सम्मान करते हुए ग्रामीणों और विशेष रूप से गाँव के युवाओं ने तय किया कि वानर राज का अंतिम संस्कार किसी साधारण जीव की तरह नहीं, बल्कि परिवार के किसी आत्मीय सदस्य की तरह संपूर्ण विधि-विधान से किया जाएगा।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली अंतिम यात्रा, युवाओं ने रखा 10 दिन का शोक
घटना के दिन ही गाँव के युवाओं ने एकजुट होकर वानर राज की भव्य अंतिम यात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और राम नाम सत्य के उद्घोष के साथ अंतिम यात्रा पूरे गाँव में भ्रमण करती हुई अंतिम संस्कार स्थल तक पहुँची, जहाँ पूर्ण धार्मिक रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद गाँव के युवाओं ने 10 दिनों तक शोक संतप्त परिवार की भाँति नियमों का पालन किया।
मुंडन कराकर और पिंडदान कर संपन्न किए गए दशा कर्म
इस दौरान खान-पान और दिनचर्या में सादगी रखते हुए 10 दिन का शोक मनाया गया।10 दिन पूरे होने पर गुरुवार शाम को हिंदू परंपराओं के अनुसार दशा कर्म के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। गाँव के युवाओं ने सर्वसम्मति से मुंडन करवाया और वानर राज की आत्मा की शांति के लिए विधिवत पिंडदान किया। पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ सभी धार्मिक प्रक्रियाएँ पूर्ण कराई गईं।
56 भोग और विशाल भंडारे का हुआ आयोजन
दसा कर्म के अवसर पर गुरुवार शाम को हनुमान मंदिर परिसर में एक विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। सबसे पहले हनुमान जी महाराज को 56 भोग अर्पित किए गए और वानर राज के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके पश्चात पूरे गाँव के सहयोग से एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें गाँव तथा आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं व ग्रामीणों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
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