इंदौर। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब इंदौर और पीथमपुर की फार्मा...
इंदौर। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब इंदौर और पीथमपुर की फार्मा इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। फार्मा कंपनियों का लगभग ₹1000 करोड़ का एक्सपोर्ट ऑर्डर बीच में ही फंस गया है। यह माल मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और अन्य यूरोपीय देशों को भेजा जाना था।
शिपिंग रूट्स बंद होने से बढ़ी परेशानी
रेड सी (लाल सागर) और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर युद्ध के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। शिपिंग कंपनियों ने इन रास्तों से माल ले जाने से मना कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है।
कच्चा माल महंगा हुआ, कंपनी ने उत्पादन कम किया
उत्पादन में भारी कटौती: निर्यात रुकने और कच्चा माल महंगा होने के कारण कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया है। इंदौर के पीथमपुर में कई कंपनियां जो पहले 24 घंटे (3 शिफ्ट) काम करती थीं, अब वे केवल एक शिफ्ट में काम करने को मजबूर हैं।
युद्ध समाप्त होने पर बाजार को सामान्य होने में डेढ़ साल लगेगा
उद्योगपतियों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध आज भी खत्म हो जाए, तो ग्लोबल मार्केट और लॉजिस्टिक्स को सामान्य स्थिति में आने में कम से कम 1.5 साल का समय लगेगा। कच्चा माल (API) चीन और अन्य देशों से आने वाले कच्चे माल की कीमतों में 20% से 30% की बढ़ोतरी हुई है। मालभाड़ा (Freight Cost) समुद्री रास्तों के बंद होने और एयर कार्गो के सीमित होने से शिपिंग लागत कई गुना बढ़ गई है।
रोजगार पर भी असर
उद्योगपतियों का कहना है कि "यह केवल माल रुकने की बात नहीं है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में हमारे भरोसे (Reliability) की भी है। अगर समय पर दवाइयां नहीं पहुंचीं, तो अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर दूसरे देशों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।" मध्य प्रदेश की यह इंडस्ट्री अब सरकार से वैकल्पिक रास्तों और राहत पैकेज की उम्मीद कर रही है ताकि इस बड़े आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
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