उज्जैन। महाकाल नगरी में चल रहे विकास कार्यों के दौरान बरती जा रही बड़ी लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है।
उज्जैन। महाकाल नगरी में चल रहे विकास कार्यों के दौरान बरती जा रही बड़ी लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा सोमवार को एक गरीब महिला को भुगतना पड़ा।
काम पर जाते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब एक महिला घरेलू काम से देसाई नगर स्थित एक घर में जा रही थी। रास्ते में निर्माणाधीन नाले के पास अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे नीचे जा गिरी। नाले के निर्माण के लिए वहां खुले में छोड़े गए लोहे के नुकीले सरिये महिला के शरीर के आर-पार हो गया।
मची चीख-पुकार, दौड़े लोग, सरिया काटकर निकाला
हादसे के बाद महिला दर्द से बुरी तरह तड़पने लगी। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय लोग तुरंत मौके पर एकत्र हो गए। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए लोगों ने सूझबूझ दिखाई और कटर की मदद से लोहे के सरिये को काटकर उसे नाले से बाहर निकाला।
मसीहा बने महापौर मुकेश टटवाल
जिस समय यह हादसा हुआ, उसी दौरान वहां से उज्जैन के महापौर (मेयर) मुकेश टटवाल गुजर रहे थे। भीड़ और दुर्घटना को देख वे तुरंत अपनी गाड़ी से उतरे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने बिना वक्त गंवाए घायल महिला को अपनी ही सरकारी गाड़ी में बैठाया और तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे।
2 घंटे चला जटिल ऑपरेशन, अब स्थिर
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने तुरंत महिला को थियेटर में लिया। डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर के भीतर फंसे सरिये को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लगभग 2 घंटे तक चले एक बेहद जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन के बाद आखिरकार सरिये को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाल लिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला की हालत अब पूरी तरह स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में निर्माण एजेंसी और प्रशासन की लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर निर्माणाधीन स्थलों पर बैरिकेडिंग या सुरक्षा के इंतजाम किए गए होते, तो यह भयानक हादसा नहीं होता।
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