योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में 8 नए मंत्रियों को विभाग आवंटित, लेकिन कुछ अहम विभाग अभी तक किसी को नहीं दिए गए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए गए 8 नए मंत्रियों को लंबी प्रतीक्षा के बाद विभाग आवंटित कर दिए गए। विभागों के बंटवारे में सबसे खास बात यह रही कि पीडब्ल्यूडी समेत कुछ अहम विभाग, जिनको लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच खींचतान की चर्चा थी, मुख्यमंत्री ने फिलहाल किसी को नहीं सौंपे हैं।
नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारियां
योगी कैबिनेट विस्तार के 8वें दिन रविवार रात नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया गया। कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय के साथ ही स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर समेत चार अन्य राज्य मंत्रियों को विभाग सौंप दिए गए।
भूपेंद्र चौधरी को मिला MSME विभाग
कैबिनेट मंत्रियों में पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। यह विभाग पहले कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के पास था। माना जा रहा था कि भूपेंद्र चौधरी को कोई बड़ा और प्रभावशाली विभाग दिया जाएगा।
मनोज पांडेय संभालेंगे खाद्य एवं रसद विभाग
एक अन्य कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह विभाग पहले मुख्यमंत्री के पास था।
स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को भी अहम विभाग
स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्रियों में अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रसाधन विभाग दिया गया है। वहीं सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी मिली है। चार अन्य राज्य मंत्रियों में कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग सौंपा गया है। कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा स्रोत विभाग की जिम्मेदारी मिली है। जबकि सुरेंद्र दिलेर को राजस्व और हंसराज विश्वकर्मा को लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है।
10 मई को हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
मालूम हो कि पिछले रविवार 10 मई को योगी सरकार 2.0 का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था। इस दौरान आनंदीबेन पटेल ने 6 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इनमें भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा शामिल थे। इसके अलावा दो राज्य मंत्रियों सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल सिंह का प्रमोशन किया गया था।
2027 चुनाव पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस कैबिनेट विस्तार में सामाजिक, जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। इसे खास तौर पर अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
योगी सरकार में शामिल किए गए 6 नए मंत्रियों में 5 दलित और ओबीसी समुदाय से आते हैं, जबकि एक ब्राह्मण समुदाय से हैं। भाजपा ने दलित, जाट, ब्राह्मण, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने का संदेश देने का प्रयास किया है।
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