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बीएलए महिला कमांडर की पाक को चेतावनी

बीएलए की महिला कमांडर की पाकिस्तान को चेतावनी, कहा- बढ़ेगा बलूच प्रतिरोध

बीएलए की महिला कमांडर शायनाज़ बलूच ने पाक सरकार और पंजाबी वर्चस्व पर बलूच लोगों के उत्पीड़न, संस्कृति और अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।

बीएलए की महिला कमांडर की पाकिस्तान को चेतावनी कहा- बढ़ेगा बलूच प्रतिरोध

Pakistan |

बलूचिस्तान (पाकिस्तान)। Baloch Liberation Army (बीएलए) की महिला कमांडर शायनाज़ बलूच ने पाकिस्तानी सरकार और जिसे उन्होंने "पंजाबी वर्चस्व" बताया है, उस पर बलूच लोगों पर अत्याचार करने और उनकी संस्कृति, पहचान व अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया है।

वीडियो संदेश में लगाए गंभीर आरोप

बीएलए के मीडिया विंग हक्कल द्वारा जारी एक वीडियो में कमांडर ने दावा किया कि बलूच समाज ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार किया है, जो दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों से अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि औपनिवेशिक शासन और बाद में पाकिस्तानी सरकार ने बलूच समाज में विभाजन पैदा किया और इसकी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना को कमजोर किया।

महिलाओं की भूमिका पर जोर

शायनाज़ बलूच ने विद्रोह में महिलाओं की भागीदारी की सराहना की और घोषणा की कि महिला लड़ाके अब "आसान निशाना" नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं ने संगठन के भीतर नेतृत्व और कमान के पद संभाले हैं और सशस्त्र संघर्ष में पुरुषों के साथ सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।

‘आज़ादी तक जारी रहेगा संघर्ष’

कमांडर ने बलूचिस्तान में संघर्ष को बलूच लोगों पर "थोपा गया युद्ध" बताया और जोर देकर कहा कि विद्रोह भावनाओं या वीरता के बजाय "जागरूकता, समझ और दर्शन" से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रांत में शोषण और दमन की नीतियां जारी रखे हुए है और "प्रचार और ब्रेनवाशिंग" के जरिए बलूच प्रतिरोध को आतंकवाद करार दे रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा बलों को सीधी चेतावनी देते हुए शायनाज़ बलूच ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक "आज़ादी" हासिल नहीं हो जाती। उन्होंने बलूच लोगों से चुप न रहने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि प्रतिरोध न करने के "भयानक परिणाम" होंगे।

युवाओं से संघर्ष में शामिल होने की अपील

कमांडर ने पाकिस्तानी राज्य के प्रति आक्रामक संदेश देते हुए दावा किया कि हर शोषित बलूच युवा और मजदूर अपनी मातृभूमि की मुक्ति के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार है। बलूचिस्तान क्षेत्र में जबरन गायब किए जाने की चिंताजनक प्रवृत्ति बनी हुई है, जहां कुछ पीड़ितों को अंततः रिहा कर दिया जाता है, जबकि अन्य को लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है या लक्षित हत्याओं का शिकार बनाया जाता है। मौलिक अधिकारों के इन उल्लंघनों ने स्थानीय आबादी के बीच असुरक्षा और अविश्वास को बढ़ा दिया है। मनमानी गिरफ्तारियों का लगातार खतरा और जवाबदेही की कमी बलूचिस्तान को अस्थिर कर रही है।

(एएनआई)

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