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आंकड़ों में कैद बचपन की असुरक्षा

पाकिस्तान में 2025 में बाल शोषण के मामलों में 8% की वृद्धि, 73% मामले केवल पंजाब में

बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन 'साहिल' द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

पाकिस्तान में 2025 में बाल शोषण के मामलों में 8 की वृद्धि 73 मामले केवल पंजाब में

फाइल फोटो |

इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन 'साहिल' द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में बाल शोषण के मामलों में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पूरे देश में कुल 3,630 घटनाएं दर्ज की गई हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने कहा कि ये आंकड़े पाकिस्तान के चार प्रांतों के 81 अखबारों में प्रकाशित रिपोर्टों के साथ-साथ इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान से संकलित किए गए थे।

अपहरण, दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन संबंध के सैकड़ों मामले दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों में 1,924 मामले (53 प्रतिशत) लड़कियों के थे, जबकि 1,625 मामलों (47 प्रतिशत) में लड़के शामिल थे। इसके अलावा, 116 मामले नवजात शिशुओं से जुड़े थे, जो अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों की असुरक्षा को उजागर करता है। रिपोर्ट किए गए अपराधों में, अपहरण सबसे आम श्रेणी थी, जिसके 1,107 मामले सामने आए। इसके बाद अप्राकृतिक यौन संबंध के 596 मामले और दुष्कर्म के 522 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में लापता बच्चों के 365 मामले, दुष्कर्म के प्रयास के 195 मामले, अप्राकृतिक यौन संबंध के प्रयास के 141 मामले, सामूहिक अप्राकृतिक यौन संबंध के 130 मामले और सामूहिक दुष्कर्म के 108 मामले भी दर्ज किए गए। अधिकारियों ने यौन शोषण के बाद हुई 58 हत्याएं और बाल विवाह के 53 मामले भी रिकॉर्ड किए।

11 से 15 साल के बच्चे सबसे ज्यादा असुरक्षित

आंकड़ों से यह भी पता चला कि 11 से 15 साल की उम्र के बच्चे सबसे ज़्यादा असुरक्षित थे, और इस उम्र के लड़कों पर लड़कियों की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभाव पड़ा था। संगठन ने बताया कि कई मामलों में, कथित अपराधी पीड़ितों के जान-पहचान वाले ही थे। बच्चों के यौन शोषण के मामलों में जान-पहचान वालों की श्रेणी सबसे ज़्यादा रिपोर्ट की गई थी।

पंजाब में सबसे ज्यादा मामले

क्षेत्रवार देखें तो, रिपोर्ट किए गए मामलों में पंजाब का हिस्सा सबसे ज़्यादा 73 प्रतिशत रहा। इसके बाद सिंध का 21 प्रतिशत, खैबर-पख्तूनख्वा का 4 प्रतिशत और बलूचिस्तान, संघीय क्षेत्रों, पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू और कश्मीर तथा गिलगित-बाल्टिस्तान का मिलाकर कुल 2 प्रतिशत हिस्सा रहा। ये निष्कर्ष पाकिस्तान में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मानवाधिकार समूहों की लगातार बनी चिंताओं को उजागर करते हैं, और साथ ही पीड़ितों के लिए अधिक मज़बूत निवारक उपायों, कानूनी प्रवर्तन और सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।

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