ढाका। बांग्लादेश में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मसूदुद्दीन चौधरी को पुलिस ने देर रात एक अभियान में गिरफ्तार कर लिया। वे 2007-2008 की सैन्य नियंत्रित सरकार में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उभरे थे
ढाका। बांग्लादेश में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मसूदुद्दीन चौधरी को पुलिस ने देर रात एक अभियान में गिरफ्तार कर लिया। वे 2007-2008 की सैन्य नियंत्रित सरकार में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उभरे थे।
पांच मामलों में दर्ज है केस
पुलिस की जांच शाखा के अनुसार, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उनके खिलाफ पांच मामले दर्ज हैं, जिनके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई। सेवानिवृत्ति के बाद मसूदुद्दीन चौधरी बांग्लादेश संसद के सदस्य बने थे। इससे पहले, उन्होंने राजदूत के रूप में कार्य किया था।
घर से हिरासत में लिया गया
पुलिस ने बताया कि चौधरी को बारीधारा डीओएचएस क्षेत्र के एक घर से हिरासत में लिया गया। 2007-2008 में जब सैन्य-नियंत्रित सरकार सत्ता में आई, तब मसूदुद्दीन चौधरी बांग्लादेश सेना की सबसे महत्वपूर्ण 9वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जीओसी थे।
सैन्य सरकार में थी अहम भूमिका
इस सैन्य नियंत्रित सरकार के गठन के बाद उन्होंने एक समिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के नाम पर कई बड़े व्यापारियों को गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनके पास काफी शक्ति थी।
खालिदा जिया और शेख हसीना की गिरफ्तारी की निगरानी
उस समय फखरुद्दीन अहमद के नेतृत्व वाली सरकार को सेना प्रमुख जनरल मोईन उद्दीन अहमद का पूरा समर्थन प्राप्त था। रिपोर्टों के अनुसार, मसूदुद्दीन चौधरी ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि उन्होंने बांग्लादेश के प्रमुख राजनेताओं जिनमें पूर्व प्रधान मंत्री खालिदा जिया और शेख हसीना शामिल थीं, की गिरफ्तारी और हिरासत की निगरानी की।
आपातकाल लागू कराने में भी भूमिका
उन्होंने कई व्यापारियों को भी गिरफ्तार किया और उस समय बांग्लादेश में आपातकाल लागू करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।
‘रक्खी वाहिनी बल’ में दे चुके हैं सेवाएं
बीडीन्यूज़ 24 के अनुसार, मसूद ने 1975 में गठित 'रक्खी वाहिनी बल' में अपनी सेवाएं दी थीं, जिसे बाद में सेना में मिला लिया गया था।
बाद में बने उच्चायुक्त और सांसद
मसूदुद्दीन चौधरी को बाद में ऑस्ट्रेलिया में बांग्लादेश के उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया और वहां से लौटने के बाद, वे पूर्व सैन्य शासक जनरल इरशाद की जातीय पार्टी में शामिल हो गए और जातीय पार्टी से संसद सदस्य चुने गए।
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