रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने ईरान की सैन्य और कूटनीतिक फ़ैसले लेने की प्रक्रिया पर प्रभावी रूप से कब्ज़ा कर लिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह बदलाव सप्ताहांत में हुआ।
तेहरान (ईरान)। रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने ईरान की सैन्य और कूटनीतिक फ़ैसले लेने की प्रक्रिया पर प्रभावी रूप से कब्ज़ा कर लिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह बदलाव सप्ताहांत में हुआ। 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इस बदलाव के तहत आईआरजीसी कमांडर मेज. जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने प्रमुख नेतृत्व की भूमिका संभाल ली है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और अमेरिका के साथ वार्ता भी लगभग टूटने की कगार पर है।
अब्बास अराघची सहित अधिकतर उदारवादी नेता हुए दरकिनार
वाशिंगटन स्थित 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित अधिकतर उदारवादी नेताओं को दरकिनार कर आईआरजीसी ने शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होने वाले फैसलों को अपने हाथों में ले लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद अस्थाई तौर पर होर्मुज जलमार्ग खोलने को तैयार हो गए थे लेकिन आईआरजीसी ने उनके फ़ैसले को पलट दिया और ज़ोर देकर कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव का सामना करने को होर्मुज जलमार्ग बंद रखने पर ही जोर दिया।
वाहीदी और सहयोगियों की पकड़ हुई और मजबूत
रिपोर्ट के मुताबिक आईआरजीसी के कमांडर वाहिदी ने ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र का समर्थन हासिल कर लिया है। इससे सैन्य और रणनीतिक अभियानों पर उनकी पकड़ और मज़बूत हो गई है। आईआरजीसी ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है। हाल के संघर्षों में अपनी पारंपरिक नौसेना को हुए नुकसान के बाद अब वह तेज़ी से हमला करने वाले जहाज़ों पर बहुत ज़्यादा निर्भर है।
नेतृत्व में बढ़ता मतभेद और कूटनीतिक टीम में दखल
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नेतृत्व में मतभेद भी सामने आए हैं। ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र का प्रभाव कूटनीतिक प्रयासों तक भी फैल गया है। उन्हें इस महीने की शुरुआत में ईरान की वार्ता टीम में शामिल किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आईआरजीसी के निर्देशों और सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के अधिकार का पालन हो।
आंतरिक विवादों के चलते वार्ता प्रक्रिया पर ब्रेक
'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' ने प्रतिनिधिमंडल के भीतर आंतरिक मतभेदों का ज़िक्र करते हुए बताया कि ज़ोलघाद्र ने आईआरजीसी नेतृत्व से शिकायत की कि अराघची ने तथाकथित 'प्रतिरोध की धुरी' के लिए ईरान के समर्थन के मामले में लचीलापन दिखाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया, जिसे हुसैन ताइब सहित अन्य हस्तियों का समर्थन प्राप्त था। विश्लेषकों का मानना है कि अब वाहीदी और मुज्तबा खामेनेई ईरान में प्रमुख निर्णयकर्ता बनकर उभरे हैं। इससे पश्चिमी देशों के साथ बातचीत की संभावनाएं और कमजोर पड़ सकती हैं।
नए शक्ति संतुलन से पश्चिम के साथ रिश्ते और तनावपूर्ण
जानकारों का कहना है कि सत्ता में इस बदलाव से पश्चिम के साथ बातचीत की संभावनाएं काफ़ी कम हो गई हैं, क्योंकि अराघची और ग़ालिबफ़ जैसे लोगों के पास नीति को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है। इन घटनाओं ने वॉशिंगटन के इस दावे को भी चुनौती दी है कि हाल ही में बड़े अधिकारियों के मारे जाने के बाद ईरान का नेतृत्व नरम पड़ गया है। नई बातचीत के लिए कोई साफ़ समय-सीमा न होने के कारण, इस बात पर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या यह नाज़ुक संघर्ष-विराम मौजूदा समय-सीमा के बाद भी बना रहेगा।
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