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चीन दबदबे बीच जापान ऑस्ट्रेलिया साझेदारी।

चीन के दबदबे और मध्य पूर्व संकट के बीच जापान-ऑस्ट्रेलिया ने मजबूत की ‘लचीली आपूर्ति श्रृंखला’ साझेदारी

वैश्विक संसाधनों पर चीन की बढ़ती पकड़ और मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच जापान और ऑस्ट्रेलिया ने रणनीतिक रूप से अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का फैसला किया है।

चीन के दबदबे और मध्य पूर्व संकट के बीच जापान-ऑस्ट्रेलिया ने मजबूत की ‘लचीली आपूर्ति श्रृंखला’ साझेदारी

Middle East Crisis |

कैनबरा |  वैश्विक संसाधनों पर चीन की बढ़ती पकड़ और मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच जापान और ऑस्ट्रेलिया ने रणनीतिक रूप से अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का फैसला किया है। दोनों देशों का लक्ष्य ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में आर्थिक झटकों से बचा जा सके।

आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा फोकस

क्योडो न्यूज के अनुसार, यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व और मध्य पूर्व में संघर्ष वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कैनबरा में मुलाकात कर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

पांच अहम दस्तावेजों पर सहमति

शिखर सम्मेलन के दौरान पांच महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए गए, जिनमें आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा प्रमुख रही। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा, खाद्य और दुर्लभ खनिजों के लिए “लचीली आपूर्ति श्रृंखला” तैयार करना है। ये खनिज सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं।

दुर्लभ खनिजों में चीन का वर्चस्व

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन वर्तमान में दुनिया के करीब 70% दुर्लभ खनिजों का खनन करता है और लगभग 90% शोधन उसी के हाथ में है। ऑस्ट्रेलिया खनिजों का बड़ा उत्पादक है, लेकिन जापान अब भी चीन से आयात पर काफी हद तक निर्भर है, जो उसकी आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करता है।

निर्यात नियंत्रण से बढ़ी चिंता

इस साल की शुरुआत में चीन ने दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं पर सख्त निर्यात नियंत्रण लागू किए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। इसे जापान के उस बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें ताइवान पर हमले की स्थिति में अमेरिका का समर्थन करने की बात कही गई थी।

ऊर्जा सुरक्षा बना अहम मुद्दा

ऊर्जा सुरक्षा भी बैठक का प्रमुख मुद्दा रही। फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे कीमतों में भारी उछाल आया है। जापान जैसे देश, जो आयातित तेल पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती बन गई है।

ऑस्ट्रेलिया की भूमिका और चुनौतियां

ऑस्ट्रेलिया जापान को द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। हालांकि, खुद ऑस्ट्रेलिया भी कुछ मामलों में मध्य पूर्व पर निर्भर है, खासकर पेट्रोलियम उत्पादों के लिए। पिछले वर्षों में घरेलू रिफाइनरियों के बंद होने से उसकी यह निर्भरता और बढ़ी है।

सुरक्षा और रक्षा सहयोग में मजबूती

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा में सहयोग को और गहरा करने का भी निर्णय लिया। 2023 में लागू पारस्परिक पहुंच समझौते (Reciprocal Access Agreement) के तहत सैन्य सहयोग पहले ही मजबूत हो चुका है, जिससे संयुक्त सैन्य अभ्यास और आवाजाही आसान हुई है। हाल ही में दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए जापान के उन्नत मोगामी श्रेणी के मॉडल पर आधारित तीन स्टील्थ फ्रिगेट देने के समझौते को अंतिम रूप दिया है। यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

राजनयिक रिश्तों की 50वीं वर्षगांठ

प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की यह यात्रा खास इसलिए भी रही क्योंकि यह दोनों देशों के बीच मैत्री संधि की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई। उनकी पांच दिवसीय यात्रा में वियतनाम का दौरा भी शामिल रहा, जो क्षेत्रीय कूटनीति को और मजबूती देने का संकेत है।  (एएनआई)

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