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बागी कवि के रूप में थी पहचान

बांगलादेश और भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु थे नजरूल इस्लामः खिलखिल काजी

ढाका। बंगला के प्रख्यात कवि काजी नजरुल इस्लाम ने अपनी साहित्यिक कृतियों के माध्यम से भारत और बांग्लादेश की जनता के लिए सांस्कृतिक सेतु का काम किया है। उन्हें बागी कवि के रूप में जाना जाता है।

बांगलादेश और भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु थे नजरूल इस्लामः खिलखिल काजी

ढाका। बंगला के प्रख्यात कवि काजी नजरुल इस्लाम ने अपनी साहित्यिक कृतियो के माध्यम से भारत और बांग्लादेश की जनता के लिए सांस्कृतिक सेतु का काम किया है। उन्हें बागी कवि के रूप में जाना जाता है। उनकी पोती खिलखिल काजी ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के लोग उन्हें असीमित प्रेम करते थे। काजी नजरूल ने दोनों ही देशों के लिए अपने जीवन का बड़ा हिस्सा लगा दिया। 

दोनों देशों में मनाई जा रही जयंती

काजी नजरूल की 127 वीं जयंती दोनों देशों में मनाई जा रही है। बांगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने नजरूल इस्लाम की याद में तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने इस वर्ष को नजरूल वर्ष के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। इस अवसर पर बांग्लादेशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा जगह-जगह सांकृतिक कार्यक्रम, उनकी कृतियों पर गोष्ठियों का आयोजन किया गया। 

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