लाहौर। पाकिस्तान का अस्थिर विदेशी वित्तीय ढांचा लगातार अर्थिक स्थिरता को खोखला कर रहा है। नीति निर्माताओं का कहना है कि...
लाहौर। पाकिस्तान का अस्थिर विदेशी वित्तीय ढांचा लगातार अर्थिक स्थिरता को खोखला कर रहा है। नीति निर्माताओं का कहना है कि विदेशी कर्ज पर निर्भरता से देश की अर्थव्यवस्था का संकट गहराता जा रहा है। व्यवसाय जगत के प्रतिनिधियों और अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि मुद्रा भंडार की स्थिति में हाल में हुए सुधार ढांचागत कमजोरी को ठीक नहीं कर सकते। इस कमजोरी की वजह तय पुनर्भुगतान है।
'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, अधिकतर कर्ज कम समय में भुगतान वाले हैं, इसलिए कर्ज का झटका झेलने की सरकार की क्षमता को कम करती है। पाकिस्तान उद्योग और व्यपार एसोशिएशन फ्रंट के उपाध्यक्ष वसीम हसन ने अधिकारियों पर दबाव डाला है कि मित्र देशों से कर्ज की अवधि बढ़ाने का जल्द आग्रह किया जाए।
हसन ने कहा कि पुनर्भुगतन की टाइम लाइन लंबी करने की जरूरत है। इसके बिना भुगतान का संकट हमेशा बना रहेगा। बता रहे हैं कि सितंबर 2025 में पाकिस्तान पर कर्ज और देयता करीब 134.5 अरब डालर थी। हालांकि इस जनवरी में मुद्रा भंडार 21 अरब डालर से ऊपर था लेकिन विश्लेषकों ने आगाह किया है कि इसका बड़ा हिस्सा विभिन्न मदों और अस्थाई तात्कालिक मदद के रूप में आया है। फिर भी 2026 और बाद के वर्षों स्थिति और गंभीर होगी।
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