पाकिस्तान के अपर दीर में 10.8 लाख आबादी पर केवल 207 डॉक्टर हैं। 13 महिला डॉक्टरों के भरोसे 5.3 लाख महिलाएं हैं, वहीं हैजे के अनियंत्रित प्रकोप ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। पाकिस्तान के अपर दीर जिले में डॉक्टरों और बुनियादी चिकित्सा ढांचे की भीषण कमी के कारण एक बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10.8 लाख की आबादी वाले इस जिले में मात्र 207 डॉक्टर तैनात हैं, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है और हाल ही में फैले हैजे (Cholera) के प्रकोप ने स्थिति को बेकाबू कर दिया है।
13 महिला डॉक्टरों पर 5.3 लाख महिलाओं की जिम्मेदारी
अपर दीर जिले में महिला स्वास्थ्य देखभाल का ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र की अनुमानित 5.3 लाख महिला आबादी के इलाज और प्रसूति संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल 13 महिला डॉक्टर ही उपलब्ध हैं।
इसका सीधा अर्थ यह है कि औसतन प्रत्येक महिला डॉक्टर पर लगभग 40,770 महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। डॉक्टरों की इस भारी किल्लत के चलते जिले में प्रसव के दौरान होने वाली मातृ और शिशु मृत्यु को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। दूसरी ओर, लगभग 5.5 लाख पुरुषों की आबादी के लिए 195 पुरुष डॉक्टर तैनात हैं, जहां प्रति डॉक्टर लगभग 3,000 लोगों की देखभाल का अनुपात बनता है।
जीटी रोड पर दौड़ती एम्बुलेंस और हैजे का कहर
स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के बीच अपर दीर इस समय हैजे (Cholera) के भीषण प्रकोप से भी जूझ रहा है। डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर (DHQ) अस्पताल दीर में रोजाना 200 से 300 संदिग्ध हैजा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हालात का जायजा लेने के लिए वॉटर-टेस्टिंग लैब की टीम ने अशिरी दारा के प्रभावित इलाकों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं, लेकिन बीमारी का प्रसार फिलहाल अनियंत्रित बना हुआ है।
अपर दीर से तिमरगरा और पेशावर की ओर गंभीर मरीजों और घायलों को ले जाती एम्बुलेंस दीर-पेशावर जीटी रोड पर आम नजारा बन चुकी हैं। विशेष जांच और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्थानीय नागरिकों को तिमरगरा, स्वात, मर्दान, पेशावर, इस्लामाबाद और लाहौर जैसे दूरदराज के शहरों की यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कागजों पर अस्पताल, लेकिन इलाज के लिए लंबा सफर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अपर दीर जिले में 1 कैटेगरी-बी DHQ अस्पताल, 2 कैटेगरी-सी अस्पताल, 5 कैटेगरी-डी अस्पताल, 32 बेसिक हेल्थ यूनिट्स (BHU) और कई ग्रामीण डिस्पेंसरियां मौजूद हैं। हालांकि, इन तमाम सुविधाओं के बावजूद मरीजों को लगातार बड़े शहरों में रेफर किए जाने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये मौजूदा अस्पताल वाकई प्रशासनिक और चिकित्सीय रूप से सक्षम हैं।
समूचे पाकिस्तान के दूरदराज और उपेक्षित इलाकों में डॉक्टरों की कमी और सीमित स्वास्थ्य ढांचा मरीजों के लिए निरंतर चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में बार-बार मरीजों को रेफर करने से वहां के अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं रोके जा सकने वाले संक्रामक रोगों के बार-बार फैलने से देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियां बेनकाब हो रही हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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