ईरान के खिलाफ शनिवार को संयुक्त ऑपरेशन- 'आपरेशन इपिक फरी' (अमेरिका) और 'आपरेशन रोरिंग लायन' (इसराइल) हितों का दुर्लभ सम्मिलन था।
रियाद। ईरान के खिलाफ शनिवार को संयुक्त ऑपरेशन- 'आपरेशन इपिक फरी' (अमेरिका) और 'आपरेशन रोरिंग लायन' (इसराइल) हितों का दुर्लभ सम्मिलन था। 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार यह इसराइल और सऊदी अरब की लॉबिंग से प्रभावित था।
सऊदी अरब का दबाव और खमेनेई का अंत
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका पर दबाव बनाया था कि वह इसराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करे। इस हमले में अंतत: ईरान के सुप्रीम नेता अयातोल्ला अली खमेनेई मारे गए। यह जानकारी इस मामले की जानकारी रखने वाले ऐसे चार लोगों से मिली है जिनकी पहचान नहीं बताई गई है।
'दुश्मन का दुश्मन दोस्त' वाली कूटनीति
ईरान के बढ़ते प्रभाव के साए में दोनों उपर्युक्त देश में वर्षों से मित्रता- दुश्मन यानी मित्रता के साथ ही अंदर अंदर दुश्मनी थी। यह संबंध 'दुश्मन का दुश्मन' जैसा है। 'वाशिंगटन पोस्ट' ने कहा है कि उपर्युक्त चारों जानकारों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने व्यक्तिगत रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल के हफ्तों में कई बार बात की। इसके साथ ही उन्होंने समस्या के समाधान के लिए राजनयिक समर्थन की बात भी कही थी।
नेतन्याहू का अभियान और ट्रंप का अंतिम आदेश
दूसरी तरफ, इसराइली प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू अपने देश के खिलाफ ईरान के खतरे को लेकर अमेरिकी हमले के लिए अरसे से जन समर्थन जुटाने का अभियान चला रहे थे। सऊदी अरब और इसराइल के सम्मिलित प्रभाव में ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व और सेना के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले का आदेश जारी किया।
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/parvo-virus-outbreak-in-bhopal-claims-lives-of-unvaccinated-dogs/146603
भोपाल में पार्वो वायरस का कहर, बिना टीकाकरण वाले कुत्तों की बढ़ीं मौतें