रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान शुक्रवार को सऊदी अरब में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
रियाद (सऊदी अरब): रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान शुक्रवार को सऊदी अरब में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद मुस्लिम-बहुल देशों के बीच सैन्य सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
'इस्लामिक नाटो' की अटकलें तेज
इस संभावित समझौते के बाद रणनीतिक हलकों में "इस्लामिक नाटो" की अवधारणा को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। यह एक अनौपचारिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल प्रमुख मुस्लिम-बहुल देशों के बीच प्रस्तावित सैन्य और रक्षा गठबंधन के संदर्भ में किया जाता है।
रक्षा सहयोग बढ़ाने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पहले ही सऊदी अरब के साथ रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता कर चुका है। अब इसमें तुर्की और अन्य देशों को शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले संकेत दिया था कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच मौजूदा रक्षा एवं आर्थिक सहयोग ढांचे को विस्तार दिया जा सकता है, जिसमें तुर्की और कतर जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं।
'समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं'
ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाना और बाहरी निर्भरता को कम करना है। उन्होंने कहा कि यह समझौता क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान-सऊदी अरब ने पहले किया था समझौता
पिछले साल सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाने की बात कही गई थी।
भारत ने कहा- प्रभावों का अध्ययन करेंगे
इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के संभावित प्रभावों का अध्ययन करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
ANI
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