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टाइप 1 मधुमेह से डिमेंशिया का खतरा ज्यादा

टाइप 1 मधुमेह से मनोभ्रंश का खतरा ज्यादा, नए अध्ययन में खुलासा

मिनेसोटा (अमेरिका), 20 मार्च। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों में मनोभ्रंश (डिमेंशिया) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है।

टाइप 1 मधुमेह से मनोभ्रंश का खतरा ज्यादा नए अध्ययन में खुलासा

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मिनेसोटा (अमेरिका), 20 मार्च। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों में मनोभ्रंश (डिमेंशिया) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टाइप 2 मधुमेह में भी मनोभ्रंश का खतरा बढ़ता है, लेकिन टाइप 1 मधुमेह में यह जोखिम और अधिक पाया गया है।

टाइप 1 मधुमेह दुर्लभ लेकिन जोखिम ज्यादा

विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप 1 मधुमेह सभी मधुमेह मामलों का लगभग 5 प्रतिशत ही होता है, लेकिन इससे पीड़ित लोगों में मनोभ्रंश का खतरा अधिक देखा गया है। चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति के कारण टाइप 1 मधुमेह के मरीज अब पहले से ज्यादा लंबे समय तक जीवित रह रहे हैं, इसलिए इस संबंध को समझना और भी जरूरी हो गया है।

बड़े स्तर पर किया गया अध्ययन

इस अध्ययन में 64 वर्ष की औसत आयु वाले 2,83,772 लोगों को शामिल किया गया। इनमें 5,442 लोगों को टाइप 1 मधुमेह और 51,511 लोगों को टाइप 2 मधुमेह था। सभी प्रतिभागियों पर औसतन 2.4 वर्षों तक नजर रखी गई।

कितने लोगों में हुआ मनोभ्रंश

अध्ययन के दौरान 2,348 लोगों में मनोभ्रंश विकसित हुआ। इनमें टाइप 1 मधुमेह वाले 144 लोग (2.6 प्रतिशत), टाइप 2 मधुमेह वाले 942 लोग (1.8 प्रतिशत) और मधुमेह रहित लोगों में 0.6 प्रतिशत मामलों में मनोभ्रंश पाया गया।

तीन गुना तक बढ़ सकता है खतरा

शोधकर्ताओं ने आयु और शिक्षा जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए पाया कि टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों में मनोभ्रंश विकसित होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी। वहीं टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में यह खतरा लगभग दोगुना पाया गया।

अध्ययन की सीमाएं भी रहीं

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह अध्ययन केवल संबंध दर्शाता है, यह साबित नहीं करता कि मधुमेह सीधे तौर पर मनोभ्रंश का कारण बनता है। अध्ययन में इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और सर्वे डेटा का उपयोग किया गया, जिससे कुछ मामलों का डेटा छूट भी सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ टाइप 1 मधुमेह के मरीजों में मनोभ्रंश के खतरे को समझना जरूरी है, ताकि भविष्य में इसे रोकने या देर से होने के उपाय खोजे जा सकें।

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