अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान द्वारा पश्चिम एशिया में दो हफ्तों के लिए युद्धविराम के एलान के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान द्वारा पश्चिम एशिया (Middle East) में दो हफ्तों के लिए युद्धविराम (Ceasefire) के एलान के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद की वजह से ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड में लगभग 15%-23% तक की गिरावट आई है, जिससे कीमतें $92-$94 प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिली राहत
अमेरिका और ईरान की घोषणा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी संजीवनी दी है। यह बदलाव न केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए, बल्कि भारत जैसे उन तमाम देशों के लिए राहत लेकर आया है जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
पश्चिम एशिया में दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता पर ईरान ने भी शर्तों के साथ सीजफायर के बाद सहमति जता दी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द ही खुलने के आसार बनने लगे हैं। उम्मीद है कि अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा।
20% वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित
दुनिया का 20 फीसदी तेल इसी इलाके से गुजरता है। लेकिन ईरान युद्ध के कारण वहां से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई थी। इसके कारण कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर था।
कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सीजफायर की घोषणा होते ही बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और लंबे समय से 100 डॉलर के ऊपर बने रहने के बाद, तेल की कीमतों में जबरदस्त कमी देखी गई। यह कोविड-19 के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट हो सकती है।
ब्रेंट और WTI में भारी गिरावट
ब्रेंट क्रूड में लगभग 15 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। बुधवार की सुबह ये 14.45 डॉलर टूटकर 94.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बेंचमार्क (WTI) में 23 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जो 97.12 डॉलर पर आ गया।
मार्च में रिकॉर्ड तेजी
मार्च के महीने में युद्ध के कारण तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई थी, जो इतिहास में किसी एक महीने में होने वाली सबसे बड़ी बढ़त थी। इस तनाव ने दुनिया के सामने एक ऐसा संकट खड़ा कर दिया था, जिसे 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा था।
भारत को बड़ा फायदा
कच्चे तेल की कीमत कम होने से भारत को भी काफी फायदा होगा। इससे रुपये पर भी दबाव कम होगा और डॉलर के मुकाबले वह मजबूत होगा। भारत अपना 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।
एलपीजी सप्लाई में सुधार की उम्मीद
ईरान युद्ध के कारण भारत में खासकर एलपीजी की काफी किल्लत हो गई थी। होर्मुज स्ट्रेट से तेल कारोबार सामान्य होने से भारत खाड़ी देशों से तेल और गैस का आयात कर सकेगा।
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