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AI से बढ़ा साइबर अटैक का खतरा

AI से बढ़ा साइबर अटैक का खतरा, कंपनियों को सिक्योरिटी सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत: मैकिन्से रिपोर्ट

मैकिन्से रिपोर्ट के मुताबिक, AI से सॉफ्टवेयर कमजोरियों का तेजी से पता लगाना और उनका फायदा उठाना आसान हुआ है। कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी सिस्टम मजबूत करने की जरूरत है।

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AI Cyber Threats Rise, Companies Need Major Security Overhaul: McKinsey |

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से विकास के साथ साइबर सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ रहा है। मैकिन्से की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को अपनी साइबर सिक्योरिटी रणनीति में बड़े बदलाव करने होंगे। इसके लिए ऑटोमेटेड थ्रेट डिटेक्शन और वल्नरेबिलिटी मैनेजमेंट में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एडवांस्ड AI मॉडल साइबर हमलावरों के लिए सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को पहचानना और उनका फायदा उठाना पहले से आसान बना रहे हैं।

वल्नरेबिलिटी सामने आने और हमले के बीच समय घटा

मैकिन्से के मुताबिक, किसी गंभीर सॉफ्टवेयर कमजोरी का खुलासा होने और उसके सक्रिय रूप से दुरुपयोग किए जाने के बीच का समय तेजी से कम हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब एक गंभीर वल्नरेबिलिटी के खुलासे और उसके सक्रिय एक्सप्लॉइटेशन के बीच औसतन कुछ घंटे का समय रह गया है, जबकि एक साल पहले यह अवधि कुछ हफ्तों की थी। इससे कंपनियों के लिए समय रहते सुरक्षा उपाय करना बड़ी चुनौती बन गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "अटैकर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, एक क्रिटिकल वल्नरेबिलिटी के डिस्क्लोजर और एक्टिव एक्सप्लॉइटेशन के बीच एवरेज टाइम अब सिर्फ कुछ घंटों का है, जबकि एक साल पहले तक यह कुछ हफ्तों का था।"

2026 में दो-तिहाई कमजोरियों का उसी दिन हुआ एक्सप्लॉइटेशन

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक एक्सप्लॉइट की गई लगभग दो-तिहाई वल्नरेबिलिटीज का इस्तेमाल उनके खुलासे वाले दिन या उससे पहले ही किया जा रहा था। इसके विपरीत, Verizon की 2026 डेटा ब्रीच इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के विश्लेषण के आधार पर कमजोरियों को पूरी तरह ठीक करने में लगने वाला औसत समय 32 दिन से बढ़कर 43 दिन हो गया। इस दौरान केवल 26 प्रतिशत कमजोरियों को ही पूरी तरह ठीक किया जा सका। यह स्थिति कंपनियों के सामने मौजूद साइबर सिक्योरिटी की चुनौती को दर्शाती है।

एडवांस्ड AI मॉडल तेजी से खोज रहे सॉफ्टवेयर की कमियां

मैकिन्से ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के पुराने तरीके अब तेजी से बदलते खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं होते जा रहे हैं। एडवांस्ड AI मॉडल कम समय में और बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर की कमजोरियों की पहचान करने में सक्षम हैं। रिपोर्ट में एंथ्रोपिक के प्रोजेक्ट ग्लासविंग का भी उल्लेख किया गया है। इसके पार्टनर्स ने क्लाउड मिथोस प्रीव्यू का इस्तेमाल करके 10,000 से अधिक हाई और क्रिटिकल सीवियरिटी वाली कमजोरियों की पहचान की। कुछ पार्टनर्स ने बग खोजने की अपनी दर में दस गुना से अधिक बढ़ोतरी की जानकारी दी।

साइबर सिक्योरिटी के चार क्षेत्रों को मजबूत करने की जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को केवल ज्यादा सिक्योरिटी कर्मचारियों की भर्ती या पैचिंग प्रक्रिया तेज करने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय उन्हें चार प्रमुख क्षेत्रों पर एक साथ काम करना होगा। इनमें साइबर सिक्योरिटी के तरीके, ऑपरेटिंग मॉडल, रिस्क और कंट्रोल फ्रेमवर्क तथा टेक्नोलॉजी शामिल हैं। मैकिन्से ने कहा कि तेजी के साथ एक एकीकृत सुरक्षा कार्यक्रम भी जरूरी है, जिसमें ऑटोमेटेड डिस्कवरी, प्राथमिकता तय करने और खतरे को सीमित करने के साथ मानवीय निगरानी भी शामिल हो।

कंपनियों को एक्सेस कंट्रोल और सप्लायर मॉनिटरिंग पर देना होगा ध्यान

मैकिन्से ने कंपनियों को सॉफ्टवेयर कमजोरियों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करने की सलाह दी है। इसके साथ ही पहचान और एक्सेस कंट्रोल को मजबूत करने, थर्ड-पार्टी सप्लायर की नियमित निगरानी करने और सुरक्षित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्रैक्टिस अपनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार सिक्योरिटी मॉनिटरिंग और कमजोरियों को तेजी से ठीक करने के साथ AI आधारित सिस्टम पर मजबूत नियंत्रण रखना भी जरूरी है।

शुरुआती 90 दिनों में लागू करें नया सिक्योरिटी फ्रेमवर्क

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कंपनियां शुरुआती 90 दिनों के भीतर नया साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क लागू करने की प्रक्रिया शुरू करें। इसकी शुरुआत सबसे जरूरी सिस्टम से की जानी चाहिए। इसके बाद मापने योग्य परिणामों के आधार पर इस फ्रेमवर्क का विस्तार किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय में जब कमजोरियां तेजी से सामने आ रही हैं और जोखिम का पहले से अधिक स्तर पर दुरुपयोग हो रहा है, डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना कंपनियों के लिए लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो सकता है।  (Source: ANI)

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