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भारत में केवल 5 दिनों का है रणनीतिक तेल भंडार

पेट्रोलियम आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता चिंताजनक, रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की जरूरत: EY

EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता बढ़कर 90% हो गई है। देश का रणनीतिक तेल भंडार सिर्फ 5 दिनों की खपत के बराबर है, जिसे बढ़ाना अनिवार्य है।

पेट्रोलियम आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता चिंताजनक रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की जरूरत ey

सांकेतिक तस्वीर | ANI

नई दिल्ली: वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग (EY) ने अपनी ताजा शोध रिपोर्ट 'भारत की पेट्रोलियम अर्थव्यवस्था: कमजोरियों से निपटना' में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी झटकों और भू-राजनीतिक संकटों से सुरक्षित रहने के लिए भारत को तुरंत अपने रणनीतिक कच्चे तेल के भंडार को बढ़ाना होगा, क्योंकि मौजूदा भंडार बेहद सीमित है।

आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता तेजी से बढ़ी

EY के विश्लेषण में बताया गया है कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता तेजी से बढ़ी है, जो वित्त वर्ष 1999 में 55% थी, वह वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 90% से थोड़ा अधिक हो चुकी है। इसके विपरीत, घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन जो वित्त वर्ष 2012 में 35.9 मिलियन मीट्रिक टन के उच्चतम स्तर पर था, वह वित्त वर्ष 2026 में घटकर महज 26.0 मिलियन मीट्रिक टन रह गया है।

चीन के मुकाबले भारत का तेल बफर स्टॉक बेहद कम

रिपोर्ट में भारत के सीमित बफर स्टॉक पर चिंता जताते हुए अमेरिकी EIA के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। भारत का रणनीतिक तेल भंडार केवल 21 मिलियन बैरल है, जो भारत की सिर्फ 5 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। जबकि, इसके मुकाबले चीन के पास 1,397 मिलियन बैरल का विशाल रणनीतिक भंडार है।

रिफाइनिंग क्षमता है भारत की ताकत

रिपोर्ट में जहां एक तरफ कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भरता को भारत की सबसे बड़ी कमजोरी बताया गया है, वहीं दूसरी तरफ आयातित कच्चे तेल को परिष्कृत करने (Refining Capacity) की घरेलू क्षमता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। पेट्रोलियम शोधन दक्षता (Refining Efficiency) में वित्त वर्ष 1998 से 2026 के बीच लगभग 33% का सुधार हुआ है।

EY के मुख्य सुझाव

बढ़ते विदेशी मुद्रा के दबाव और आयात निर्भरता को कम करने के लिए EY ने भारत सरकार को निम्नलिखित कदम उठाने की सलाह दी है। 

  1. वैश्विक कच्चे तेल की स्थिति सामान्य होते ही रणनीतिक तेल भंडार के बुनियादी ढांचे और खरीद में निवेश बढ़ाएं।
  2. घरेलू स्तर पर उपलब्ध कच्चे तेल के दोहन और नए कुओं की खोज पर विशेष जोर दिया जाए।
  3. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) सहित हरित ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोतों की ओर बदलाव की गति को तेज किया जाए।

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