MOFSL की रिपोर्ट के अनुसार सोने में 8% तक गिरावट संभव, लेकिन 12-15 महीनों में नए रिकॉर्ड स्तर का अनुमान। जानिए गोल्ड निवेश रणनीति, कीमतों के लक्ष्य और बाजार के प्रमुख संकेत।
नई दिल्ली। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) ने अपनी 'H1 2026 प्रेशियस मेटल्स आउटलुक' (पहली छमाही 2026 की कीमती धातुओं की रिपोर्ट) में कहा है कि आने वाले 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचने से पहले, निकट भविष्य में इसमें 8 प्रतिशत तक की गिरावट (करेक्शन) आ सकती है। इसके साथ ही, ब्रोकरेज हाउस ने निवेशकों को धीरे-धीरे सोना खरीदने (स्टैगर्ड एक्युमुलेशन) की रणनीति अपनाने और धैर्य रखने की सलाह दी है।
12-15 महीने में बड़े लक्ष्य की उम्मीद
MOFSL की रिपोर्ट में सोने की कीमतों को तय करने वाले कारकों में आए बदलाव का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि अब भू-राजनीतिक तनाव (सीमा पर या देशों के बीच आपसी विवाद) का फायदा हमेशा अपने आप इस कीमती धातु को नहीं मिल रहा है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए धीरे-धीरे सोना खरीदने की रणनीति की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि "मौजूदा स्तरों से सोने में 6 से 8 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इसके बाद, 12 से 15 महीने की अवधि में यह पहले 4,800 डॉलर (लगभग 4,56,564.24 रुपये) और फिर 5,500 डॉलर से अधिक (लगभग 5,23,146.53 रुपये) के लक्ष्य को छू सकता है।"
घरेलू मोर्चे पर, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर (USD/INR) 95.5 मानकर, ब्रोकरेज फर्म ने 1,33,000 रुपये से 1,30,000 रुपये के बीच सोना खरीदने का स्तर बताया है, जिसके मध्यम अवधि के लक्ष्य 1,68,000 रुपये और इसके बाद 1,93,000 रुपये तय किए गए हैं।
ब्याज दरें और डॉलर तय करेंगे आगे की दिशा
साल 2026 की शुरुआत में टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर अनिश्चितता, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में मजबूत निवेश, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरें घटाने की उम्मीदों के चलते सोने में जोरदार तेजी आई थी। हालांकि, साल की दूसरी तिमाही में हालात बदल गए। टैरिफ और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया, जिससे बाजार यह मानकर चलने लगा कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। इससे अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला वास्तविक रिटर्न (रियल ट्रेजरी यील्ड) और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुए, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का आकर्षण कुछ कमजोर हुआ।
गिरावट को खरीदारी के मौके की तरह देखें
ब्रोकरेज फर्म ने दो मुख्य बातों- अमेरिका में महंगाई की दिशा और नए नेतृत्व के तहत फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि, "सोने में लंबी अवधि का निवेश का नजरिया अभी भी मजबूत है, लेकिन आने वाले साल में जल्दबाजी के बजाय धैर्य रखने की जरूरत है।" जब तक वास्तविक ब्याज दरों में बड़ी गिरावट शुरू नहीं होती, तब तक सोना एक तय दायरे में रह सकता है या निकट भविष्य में इसमें 6 से 8 प्रतिशत की और गिरावट आ सकती है। इसलिए, निवेशकों को बाजार के सबसे निचले स्तर का अंदाजा लगाने की कोशिश करने के बजाय, कीमतों में गिरावट आने पर किश्तों में धीरे-धीरे सोना खरीदने (स्टैगर्ड एक्युमुलेशन) पर विचार करना चाहिए।
चांदी में निवेश को लेकर सावधानी जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि, "जिन निवेशकों का नजरिया 12 से 15 महीने का है, उन्हें मौजूदा कमजोरी को बाजार से बाहर निकलने के बजाय खरीदारी के एक मौके के रूप में देखना चाहिए। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोना खरीदे जाने, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय स्थिति बिगड़ने और करेंसी (मुद्रा) की वैल्यू गिरने से बचाव के रूप में सोने की मजबूत भूमिका को देखते हुए यह सलाह दी गई है।" इसके साथ ही, ब्रोकरेज हाउस ने चांदी के निवेशकों को उसकी ज्यादा अस्थिरता (कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव) को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि चांदी की दोहरी भूमिका है- यह एक कीमती धातु होने के साथ-साथ एक औद्योगिक धातु भी है, जिसकी मांग बिजली और ऊर्जा क्षेत्र (विद्युतीकरण की मांग) से जुड़ी हुई है।
Smart FAQ Block
Q1: क्या मौजूदा समय में सोना खरीदना सही है या और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
उत्तर: मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में सोने में 6 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट (करेक्शन) आ सकती है। इसलिए बाजार के सबसे निचले स्तर की सटीक भविष्यवाणी करने के बजाय, निवेशकों को 'स्टैगर्ड एक्युमुलेशन' (यानी किश्तों में धीरे-धीरे खरीदारी) की रणनीति अपनानी चाहिए।
Q2: आने वाले 12 से 15 महीनों में सोने का संभावित लक्ष्य (Target Price) क्या है?
उत्तर: वैश्विक बाजार में सोने के शुरुआती लक्ष्य 4,800 डॉलर और इसके बाद 5,500 डॉलर से अधिक रहने का अनुमान है। वहीं घरेलू बाजार (कमोडिटी मार्केट) में मध्यम अवधि के लिए 1,68,000 रुपये और 1,93,000 रुपये के स्तर तय किए गए हैं।
Q3: सोने की कीमतों में अचानक सुस्ती या गिरावट आने के पीछे क्या मुख्य कारण हैं?
उत्तर: अमेरिका में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनावों से बढ़ी महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावनाओं के कारण बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत हुए हैं, जिससे सोने की चमक पर अस्थायी असर पड़ा है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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